प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 4477
حَدَّثَنَا يَحْيَى حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ أَبِي خَالِدٍ عَنْ عَامِرٍ عَنْ مَسْرُوقٍ قَالَ قُلْتُ لِعَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَايَا أُمَّتَاهْ هَلْ رَأَى مُحَمَّدٌ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَبَّهُ فَقَالَتْ لَقَدْ قَفَّ شَعَرِي مِمَّا قُلْتَ أَيْنَ أَنْتَ مِنْ ثَلَاثٍ مَنْ حَدَّثَكَهُنَّ فَقَدْ كَذَبَ مَنْ حَدَّثَكَ أَنَّ مُحَمَّدًا صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَأَى رَبَّهُ فَقَدْ كَذَبَ ثُمَّ قَرَأَتْ{ لَا تُدْرِكُهُ الْأَبْصَارُ وَهُوَ يُدْرِكُ الْأَبْصَارَ وَهُوَ اللَّطِيفُ الْخَبِيرُ }{ وَمَا كَانَ لِبَشَرٍ أَنْ يُكَلِّمَهُ اللَّهُ إِلَّا وَحْيًا أَوْ مِنْ وَرَاءِ حِجَابٍ }وَمَنْ حَدَّثَكَ أَنَّهُ يَعْلَمُ مَا فِي غَدٍ فَقَدْ كَذَبَ ثُمَّ قَرَأَتْ{ وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ مَاذَا تَكْسِبُ غَدًا }وَمَنْ حَدَّثَكَ أَنَّهُ كَتَمَ فَقَدْ كَذَبَ ثُمَّ قَرَأَتْ{ يَا أَيُّهَا الرَّسُولُ بَلِّغْ مَا أُنْزِلَ إِلَيْكَ مِنْ رَبِّكَ }الْآيَةَ وَلَكِنَّهُ رَأَى جِبْرِيلَ عَلَيْهِ السَّلَام فِي صُورَتِهِ مَرَّتَيْنِ
हमें [याह्या] बताया है हमें [वाकी] [इस्माइल बिन अबू खालिद] से [अमीर] से [मसरुक] से बताया है उसने कहा; मैंने ['आइस्याह रदिअल्लाहु अन्हा] से पूछा हे मां, क्या यह सच है कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कभी अपने भगवान को देखा था? आइस्या ने उत्तर दिया; आपने जो कहा उससे मेरे रोंगटे खड़े हो गए हैं। तीन बातें जो कोई तुमसे कहता है, वह वास्तव में झूठ बोल रहा है। जो कोई तुमसे कहता है कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कभी अपने भगवान को देखा है, वह झूठ बोल रहा है। फिर आइस्या ने आयत पढ़ी; वह आँखों की दृष्टि से नहीं पहुँचा जा सकता, जबकि वह सब कुछ देख सकता है जो दिखाई देता है; और वह सबसे सूक्ष्म, सर्वज्ञ है। (अल अनआम: 103) और यह असंभव है कि अल्लाह किसी इंसान से प्रकाशना के माध्यम से या पर्दे के पीछे से ही बात करे। (अस शूरा: 51) और जो कोई तुमसे कहे कि उसे पता है कि कल क्या होगा, वह झूठ बोल रहा है। फिर ऐश्या ने आयत पढ़ी; और कोई भी (पक्के तौर पर) नहीं जान सकता कि वह कल क्या करेगा। (लुक़मान: 34) और जो कोई तुमसे कहे कि वह कुछ छिपा रहा है, वह झूठ बोल रहा है। फिर ऐश्या ने आयत पढ़ी; ऐ रसूल, जो कुछ तुम्हारे रब की तरफ़ से तुम पर उतारा गया है, उसे पहुँचा दो। (अल माइदा; 67) बस इतना है कि उसने जिब्रील का रूप दो बार देखा था।