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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
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- Allah Sifat zat Allah Sifat tersenyum bagi Allah Berdoa kepada Allah sehingga Allah tersenyum, jika Allah tersenyum maka Allah telah mengijinkannya untuk masuk ke dalam syurga

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Berdoa kepada Allah sehingga Allah tersenyum, jika Allah tersenyum maka Allah telah mengijinkannya untuk masuk ke dalam syurga
Imam Ahmad : 7392

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَزِيدَ اللَّيْثِيِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ النَّاسُ يَا رَسُولَ اللَّهِ هَلْ نَرَى رَبَّنَا يَوْمَ الْقِيَامَةِ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَلْ تُضَارُّونَ فِي الشَّمْسِ لَيْسَ دُونَهَا سَحَابٌ قَالُوا لَا يَا رَسُولَ اللَّهِ فَقَالَ هَلْ تُضَارُّونَ فِي الْقَمَرِ لَيْلَةَ الْبَدْرِ لَيْسَ دُونَهُ سَحَابٌ فَقَالُوا لَا يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ فَإِنَّكُمْ تَرَوْنَهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ كَذَلِكَ يَجْمَعُ اللَّهُ النَّاسَ فَيَقُولُ مَنْ كَانَ يَعْبُدُ شَيْئًا فَيَتْبَعُهُ فَيَتْبَعُ مَنْ كَانَ يَعْبُدُ الْقَمَرَ الْقَمَرَ وَمَنْ كَانَ يَعْبُدُ الشَّمْسَ الشَّمْسَ وَيَتْبَعُ مَنْ كَانَ يَعْبُدُ الطَّوَاغِيتَ الطَّوَاغِيتَ وَتَبْقَى هَذِهِ الْأُمَّةُ فِيهَا مُنَافِقُوهَا فَيَأْتِيهِمْ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ فِي غَيْرِ الصُّورَةِ الَّتِي تَعْرِفُونَ فَيَقُولُ أَنَا رَبُّكُمْ فَيَقُولُونَ نَعُوذُ بِاللَّهِ مِنْكَ هَذَا مَكَانُنَا حَتَّى يَأْتِيَنَا رَبُّنَا فَإِذَا جَاءَ رَبُّنَا عَرَفْنَاهُ قَالَ فَيَأْتِيهِمْ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ فِي الصُّورَةِ الَّتِي يَعْرِفُونَ فَيَقُولُ أَنَا رَبُّكُمْ فَيَقُولُونَ أَنْتَ رَبُّنَا فَيَتْبَعُونَهُ قَالَ وَيُضْرَبُ جِسْرٌ عَلَى جَهَنَّمَ قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَكُونُ أَوَّلَ مَنْ يُجِيزُ وَدَعْوَى الرُّسُلِ يَوْمَئِذٍ اللَّهُمَّ سَلِّمْ سَلِّمْ وَبِهَا كَلَالِيبُ مِثْلُ شَوْكِ السَّعْدَانِ هَلْ رَأَيْتُمْ شَوْكَ السَّعْدَانِ قَالُوا نَعَمْ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ فَإِنَّهَا مِثْلُ شَوْكِ السَّعْدَانِ غَيْرَ أَنَّهُ لَا يَعْلَمُ قَدْرَ عِظَمِهَا إِلَّا اللَّهُ تَعَالَى فَتَخْطَفُ النَّاسَ بِأَعْمَالِهِمْ فَمِنْهُمْ الْمُوبَقُ بِعَمَلِهِ وَمِنْهُمْ الْمُخَرْدَلُ ثُمَّ يَنْجُو حَتَّى إِذَا فَرَغَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ مِنْ الْقَضَاءِ بَيْنَ الْعِبَادِ وَأَرَادَ أَنْ يُخْرِجَ مِنْ النَّارِ مَنْ أَرَادَ أَنْ يَرْحَمَ مِمَّنْ كَانَ يَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ أَمَرَ الْمَلَائِكَةَ أَنْ يُخْرِجُوهُمْ فَيَعْرِفُونَهُمْ بِعَلَامَةِ آثَارِ السُّجُودِ وَحَرَّمَ اللَّهُ عَلَى النَّارِ أَنْ تَأْكُلَ مِنْ ابْنِ آدَمَ أَثَرَ السُّجُودِ فَيُخْرِجُونَهُمْ قَدْ امْتُحِشُوا فَيُصَبُّ عَلَيْهِمْ مِنْ مَاءٍ يُقَالُ لَهُ مَاءُ الْحَيَاةِ فَيَنْبُتُونَ نَبَاتَ الْحِبَّةِ فِي حَمِيلِ السَّيْلِ وَيَبْقَى رَجُلٌ يُقْبِلُ بِوَجْهِهِ إِلَى النَّارِ فَيَقُولُ أَيْ رَبِّ قَدْ قَشَبَنِي رِيحُهَا وَأَحْرَقَنِي ذَكَاؤُهَا فَاصْرِفْ وَجْهِي عَنْ النَّارِ فَلَا يَزَالُ يَدْعُو اللَّهَ حَتَّى يَقُولَ فَلَعَلِّي إِنْ أَعْطَيْتُكَ ذَلِكَ أَنْ تَسْأَلَنِي غَيْرَهُ فَيَقُولُ لَا وَعِزَّتِكَ لَا أَسْأَلُكَ غَيْرَهُ فَيَصْرِفُ وَجْهَهُ عَنْ النَّارِ فَيَقُولُ بَعْدَ ذَلِكَ يَا رَبِّ قَرِّبْنِي إِلَى بَابِ الْجَنَّةِ فَيَقُولُ أَوَلَيْسَ قَدْ زَعَمْتَ أَنْ لَا تَسْأَلَنِي غَيْرَهُ وَيْلَكَ يَا ابْنَ آدَمَ مَا أَغْدَرَكَ فَلَا يَزَالُ يَدْعُو حَتَّى يَقُولَ فَلَعَلِّي إِنْ أَعْطَيْتُكَ أَنْ تَسْأَلَنِي غَيْرَهُ فَيَقُولُ لَا وَعِزَّتِكَ لَا أَسْأَلُكَ غَيْرَهُ وَيُعْطِي مِنْ عُهُودِهِ وَمَوَاثِيقِهِ أَنْ لَا يَسْأَلَ غَيْرَهُ فَيُقَرِّبُهُ إِلَى بَابِ الْجَنَّةِ فَإِذَا دَنَا مِنْهَا انْفَهَقَتْ لَهُ الْجَنَّةُ فَإِذَا رَأَى مَا فِيهَا مِنْ الْحِبَرَةِ وَالسُّرُورِ سَكَتَ مَا شَاءَ اللَّهُ أَنْ يَسْكُتَ ثُمَّ يَقُولُ يَا رَبِّ أَدْخِلْنِي الْجَنَّةَ فَيَقُولُ أَوَلَيْسَ قَدْ زَعَمْتَ أَنْ لَا تَسْأَلَ غَيْرَهُ وَقَدْ أَعْطَيْتَ عُهُودَكَ وَمَوَاثِيقَكَ أَنْ لَا تَسْأَلَنِي غَيْرَهُ فَيَقُولُ يَا رَبِّ لَا تَجْعَلْنِي أَشْقَى خَلْقِكَ فَلَا يَزَالُ يَدْعُو اللَّهَ حَتَّى يَضْحَكَ اللَّهُ فَإِذَا ضَحِكَ مِنْهُ أَذِنَ لَهُ بِالدُّخُولِ فِيهَا فَإِذَا أُدْخِلَ قِيلَ لَهُ تَمَنَّ مِنْ كَذَا فَيَتَمَنَّى ثُمَّ يُقَالُ تَمَنَّ مِنْ كَذَا فَيَتَمَنَّى حَتَّى تَنْقَطِعَ بِهِ الْأَمَانِيُّ فَيُقَالُ لَهُ هَذَا لَكَ وَمِثْلُهُ مَعَهُ قَالَ وَأَبُو سَعِيدٍ جَالِسٌ مَعَ أَبِي هُرَيْرَةَ وَلَا يُغَيِّرُ عَلَيْهِ شَيْئًا مِنْ قَوْلِهِ حَتَّى إِذَا انْتَهَى إِلَى قَوْلِهِ هَذَا لَكَ وَمِثْلُهُ مَعَهُ قَالَ أَبُو سَعِيدٍ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ هَذَا لَكَ وَعَشَرَةُ أَمْثَالِهِ مَعَهُ قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ حَفِظْتُ مِثْلُهُ مَعَهُ قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ وَذَلِكَ الرَّجُلُ آخِرُ أَهْلِ الْجَنَّةِ دُخُولًا الْجَنَّةَ

हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुरज्जाक] हमरा सब के [मा'मर] के [अज ज़ुहरी] स ['अथो` बिन यजीद अल लैट्स] स [अबू हुरैरा] स कहलक अछि; लोक कहैत छल: 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह की हम सब कयामत के दिन अपन रब के देखब?' त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसलाम कहलनि जे, जखन अहाँ सूर्य के देखैत छी जे ओकर नीचा कोनो मेघ नहि अछि तखन अहाँ खतरनाक महसूस करैत छी? ओ सब कहलक: 'नहि, हे अल्लाह के रसूलुल्लाह!' तखन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सलाम कहलनि: 'की अहाँ केँ खतरनाक बुझाइत अछि जँ अहाँ पूर्णिमा केर राति मे चान केँ देखब जकर नीचाँ कोनो मेघ नहि हो?', ओ सभ कहलनि; 'नहि, हे अल्लाह के रसूलुल्लाह!' रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सलाम कहलनि: 'सत्ते, अहाँ हुनका कयामत के दिन देखब, ताहि लेल अल्लाह लोक के जुटा क कहताह: 'जे कियो कोनो चीज के इबादत केने अछि तखन ओकर पालन करू,' तखन जे चंद्रमा के इबादत करैत अछि ओ चंद्रमा के पालन करैत अछि आ जे सूर्य के इबादत करैत अछि ओ सूर्य के पालन करैत अछि आ जे तगहूत के इबादत करैत अछि ओ तगूत के पालन करैत अछि आ ओतय ई उम्मा रहि जाइत अछि जाहि में पाखंडी अछि, तखन अल्लाह अज्जा व जल्ला हुनका सब लग जे किछु जनैत छी ताहि के अलावा दोसर रूप में अबैत छथि, अल्लाह कहैत छथि: 'हम अहाँक प्रभु छी,' तें ओ सब कहैत छथि; 'हम तोरा सँ अल्लाह के शरण लैत छी, ई हमर सबहक जगह अछि जाबत हमर प्रभु हमरा सब लग नहि आबि गेलाह आ जँ हमर रब हमरा सब लग आबि गेल छथि त हम सब हुनका चिन्हैत छी,' रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सलाम कहलनि: तखन अल्लाह अज्जा व जल्ला हुनका सब लग एहन रूप मे आबि गेलाह जे ओ सब जनैत छलाह आ कहलनि: 'हम अहाँक प्रभु छी,' ओ सब कहलनि; ‘अहाँ हमर सभक प्रभु छी,’ तेँ ओ सभ हुनकर पाछाँ लागि गेलाह,’ रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसलाम कहलनि: ‘आ जहानम पर एकटा पुल राखल गेल,’ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसलाम कहलनि: ‘त हम सबसँ पहिने एकरा पार केलहुँ, आ ओहि दिन रसूलुल्लाह केर प्रार्थना छल: ‘हे अल्लाह, बचाउ, बचाउ’ आ जहानम मे स’दानक काँट सन कतेको हुक छल - बहुत तेज काँट -, अहाँकेँ बुझल अछि जे सदन काँट की होइत छैक ?' ओ सभ कहलक: 'हँ, हे अल्लाहक रसूलुल्लाह!' रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सलाम कहलनि: 'सत्ते ई हुक स' के काँट जकाँ अछि आ मात्र ई पता नहि अछि जे ई कतेक पैघ अछि सिवाय अल्लाह तआला के, ताहि लेल ई हुक लोक के ओकर कर्म के हिसाब सं पकड़ि लैत अछि, ओहि मे एहन लोक सेहो अछि जे ओकर कर्म के कारण नष्ट भ जाइत अछि आ ओहि मे ओकर शरीर के किछु हिस्सा सेहो अछि जे एहि हुक सं मारल जाइत अछि आ फेर बचि जाइत अछि, तें कि जखन अल्लाह अज्जा व जल्ला अपन सेवक के परीक्षा समाप्त क लेताह, आ ओहि लोक के नरक स बाहर निकालताह जे हुनकर मर्जी अछि जे ओ लोक के समूह स हुनकर रहम प्राप्त करथि जे गवाही दैत छथि जे अल्लाह के अलावा कोनो देवता नै छथि, तखन अल्लाह अज्जा व जल्ला फरिश्ता सब के आदेश देलखिन जे हुनका सब के नरक स बाहर निकालल जाय, फरिश्ता सब हुनका सब के पता - संकेत - सजदा के निशान स चिन्हलखिन आ अल्लाह अज्जा व जल्ला स नरक स खाय स मना क देने छैथ आदम के बच्चा आ पोता-पोती के सजदा के निशान, तखन स्वर्गदूत ओकरा सब के जरि गेल अवस्था में बाहर निकाललकै आ फेर ओकरा सब पर पानि छिड़कि देलकै जेकरा जीवन के पानि कहल जाय छै ताकि ओ बीज के तरह बढ़य जे बढ़ै छै। पानिक पोखरि मे एकटा एहन आदमी रहैत छल जिनकर मुँह नरक दिस घुमा कऽ ​​कहैत छलनि; 'हे हमर प्रभु, नरक हमरा सचमुच आहत केलक अछि आ ओकर लौ हमरा जरा देलक अछि, तें हमर मुँह नरक सं दूर करू,' आ ओ एखनो अल्लाह सं प्रार्थना करैत रहल जाबत अल्लाह कहलनि: शायद जं हम अहाँ कें से द' देब तखन अहाँ हमरा सं किछु आओर मांगब,' तखन ओ कहलनि; 'नहि, अहाँक इच्छा सँ हम अहाँ सँ आओर किछु नहि पूछब,' तखन अल्लाह नरक सँ मुँह घुमा लेलनि आ तकर बाद कहलनि; ‘हे हमर प्रभु, हमरा स्वर्गक दरबज्जा के नजदीक आनि दियौक,’ अल्लाह कहलनि: ‘की अहाँ वादा नहि केने रही जे अहाँ हमरा सँ आओर किछु नहि पूछब, हाय तोरा हे आदम के बेटा, अहाँ कतेक गद्दार छी,’ तखन ओ नमाज करैत रहलाह जा धरि अल्लाह नहि कहलनि ओकरा: 'भ' सकै छै जे जँ हम अहाँकेँ देब तँ अहाँ दोसर माँगब', ओ कहलनि; 'अहाँक इज्जत सँ हम अहाँ सँ आओर किछु नहि माँगब,' आ ओ वादा केलनि आ कसम खा लेलनि जे आन किछु नहि माँगब, तखन अल्लाह हुनका स्वर्गक दरबज्जाक नजदीक अनलनि जाहि सँ जखन ओ ओकर नजदीक छलाह तखन स्वर्ग हुनका प्रकट भ' गेलनि आ जखन ओ देखलनि जे ओहि मे की छल जीवन आ सुखक भोगक रूप मे तखन ओ बस चुप रहलाह जाबत धरि अल्लाह हुनका चुप रहबाक इच्छा रखैत छलाह, तखन ओ कहलनि; 'हे हमर प्रभु, हमरा स्वर्ग मे प्रवेश करू,' तखन अल्लाह कहलनि: 'की अहाँ वादा नहि केने रही जे अहाँ आओर किछु नहि मांगब? असल मे अहाँ अपन वचन आ शपथ द' देने छी जे हमरा सँ आओर किछु नहि माँगब' तखन ओ कहलनि; 'हे हमर प्रभु, हमरा अपन प्राणी मे सबसँ दयनीय नहि बनाउ' आ ओ एखनो अल्लाह सँ दुआ करैत रहैत छथि जाहि सँ अल्लाह मुस्कुराइत छथि, आ जँ अल्लाह हुनका देखि मुस्कुरा देने छथि तखन अल्लाह हुनका स्वर्ग मे प्रवेश करबाक अनुमति द' देने छथि, आ जखन हुनका ओहि मे राखल गेल छनि तखन हुनका कहल जाइत छनि; 'ई भेटबाक सपना देखू,' तेँ ओ सपना देखलक, फेर कहलक -ओकरा फेर सँ-; ‘सपना देखब जे भेटय’ तेँ ओ सपना देखलक जे ओकर इच्छा बाधित भ’ गेलै आ तखन ओकरा कहल गेलै; 'ई अहाँक आ हुनका संग एहने लोकक लेल अछि'।' अथो` कहलनि: आ ओहि समय अबू सैद अबू हुरैरा के संग बैसल छलाह, आ अबू हुरैरा के कहल बात में बिल्कुल बदलाव नहि केलनि जाहि सं जखन अबू हुरैरा नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसलाम के वचन पर आबि गेलाह: 'ई हुनका संग अहाँक आ एहने लोक के लेल अछि' [अबू सईद] कहलनि: 'हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसलाम स एहि तरहे कहैत सुनने छलहुं: 'ई अहाँक लेल आ दस गुना बेसी उदाहरण लेल हुनका संग', अबू हुरैरा कहलनि; हम -बस रटलहुँ- आ उदाहरण लेल हुनका संग। अबू हुरैरा कहलनि; 'आ ओ स्वर्गवासी मे अंतिम अछि जे स्वर्ग मे प्रवेश केलक'।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 7392, 7586