Hadith Representative
Thawaf ifadhah dan melempar jumrah pada hari-hari tasyriq
Imam Abu Dawud : 1683حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ بَحْرٍ وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ الْمَعْنَى قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ الْأَحْمَرُ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَقَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْقَاسِمِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْأَفَاضَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ آخِرِ يَوْمِهِ حِينَ صَلَّى الظُّهْرَ ثُمَّ رَجَعَ إِلَى مِنًى فَمَكَثَ بِهَا لَيَالِيَ أَيَّامِ التَّشْرِيقِ يَرْمِي الْجَمْرَةَ إِذَا زَالَتْ الشَّمْسُ كُلُّ جَمْرَةٍ بِسَبْعِ حَصَيَاتٍ يُكَبِّرُ مَعَ كُلِّ حَصَاةٍ وَيَقِفُ عِنْدَ الْأُولَى وَالثَّانِيَةِ فَيُطِيلُ الْقِيَامَ وَيَتَضَرَّعُ وَيَرْمِي الثَّالِثَةَ وَلَا يَقِفُ عِنْدَهَا
हम [अली बिन बहर] अऊर [अब्दुल्ला बिन सैद] का अर्थ बताय के, उइ कहिन; हमका [अबू खालिद अल अहमर] से [मुहम्मद बिन इशाक] से [अब्दुर्रहमान बिन अल कासिम] से [अपने पिता] से [ऐस्याह] से कहिन है, उ कहिन; रसूलुल्लाह shallअल्लाहु वअलेहि वसल्लम अपने आखिरी दिन तवाफ इफदाह किहिन जब उ दोपहर के नमाज पढ़िन, फिर उ मीना लौटि आए अऊर वहाँ कई रातें रहे, तसीरिक के दिनन मा। जब सूरज डूब गवा तौ ऊ जूरी का फेंक दिहिस। हर जुमरा मा सात कंकड़, उ एक-एक कंकड़ फेंके से तकबीर कहिन, उ पहिली अऊर दूसर जुमरा पर खड़ा रहे फिर बहुत देर तक खड़े रहे अऊर अपने आप का विनम्र किहिन, अऊर तीसरा फेंकिन अऊर तीसर जुमरा पर खड़ा नाहीं भए।