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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



- Haji dan Umrah Ka’bah Ka’bah adalah kiblat bagi seluruh umat Islam

हदीस :
हदीस : 1
हदीस
Ka’bah adalah kiblat bagi seluruh umat Islam
Imam Tirmidzi : 2888

حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ إِسْرَائِيلَ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ قَالَلَمَّا قَدِمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْمَدِينَةَ صَلَّى نَحْوَ بَيْتِ الْمَقْدِسِ سِتَّةَ أَوْ سَبْعَةَ عَشَرَ شَهْرًا وَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُحِبُّ أَنْ يُوَجَّهَ إِلَى الْكَعْبَةِ فَأَنْزَلَ اللَّهُ{ قَدْ نَرَى تَقَلُّبَ وَجْهِكَ فِي السَّمَاءِ فَلَنُوَلِّيَنَّكَ قِبْلَةً تَرْضَاهَا فَوَلِّ وَجْهَكَ شَطْرَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ }فَوُجِّهَ نَحْوَ الْكَعْبَةِ وَكَانَ يُحِبُّ ذَلِكَ فَصَلَّى رَجُلٌ مَعَهُ الْعَصْرَ قَالَ ثُمَّ مَرَّ عَلَى قَوْمٍ مِنْ الْأَنْصَارِ وَهُمْ رُكُوعٌ فِي صَلَاةِ الْعَصْرِ نَحْوَ بَيْتِ الْمَقْدِسِ فَقَالَ هُوَ يَشْهَدُ أَنَّهُ صَلَّى مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَّهُ قَدْ وُجِّهَ إِلَى الْكَعْبَةِ قَالَ فَانْحَرَفُوا وَهُمْ رُكُوعٌقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ رَوَاهُ سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ

हमनी के बतवले बा [हन्नाद] हमनी के [वाकी'] से [इजराइल] से [अबू इशक] से [अल बारा` बिन अजीब] से बतवले बाड़े उ कहले; 'जब रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मदीना पहुंचले त सोलह-सतरह महीना तक बैतुल मकदीस के ओर मुँह क के नमाज पढ़ले, लेकिन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम काबा के ओर मुँह करे के चाहत रहले, एहसे अल्लाह इ आयत जारी कईले कि, 'वास्तव में, हमनी के -अक्सर- आपके चेहरा आसमान के ओर देखत देखनी, तब सचमुच हमनी के आपके किब्ला के ओर मोड़ देब कि आप।' पसन। भव्य मस्जिद के ओर मुँह घुमाईं। QS अल-बकरा: 144. फिर उ काबा के ओर मुँह घुमा दिहले, आ उनुका ई बहुत पसंद आइल, फेर केहू उनका साथे अस्र के नमाज पढ़लस। एकरा बाद उ अंसार दोस्तन के एगो समूह के पास से गुजरले, उ लोग बैतुल मकदीस के सामना करत असर के नमाज में प्रणाम करत रहले। बर्रा` कहलस; दोस्त गवाही देले कि उ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संगे अस्र नमाज कईले बाड़े अवुरी उनुका के काबा पेश कईल गईल बा। बर्रा` कहलस; उ लोग भी प्रणाम के हालत में आपन चेहरा घुमा लेले।' अबू ईसा कहले कि; ई हदीस प्रामाणिक बा। [सुफयान अतस त्सौरी] भी [अबू इशाक] से एकरा के बतवले बाड़े।

हदीस :

Imam Ahmad : 2140, 3100, 17806
Imam Bukhari : 39, 384, 4132, 6711
Imam Muslim : 818, 819
Imam Abu Dawud : 427
Imam Tirmidzi : 2888
Imam Nasa'i : 484, 485, 734
Imam Malik : 412