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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



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हदीस खोज परिणाम :
कुल हदीस : 1
प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 101

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ قَالَ حَدَّثَنِي اللَّيْثُ قَالَ حَدَّثَنِي سَعِيدٌ هُوَ ابْنُ أَبِي سَعِيدٍ عَنْ أَبِي شُرَيْحٍأَنَّهُ قَالَ لِعَمْرِو بْنِ سَعِيدٍ وَهُوَ يَبْعَثُ الْبُعُوثَ إِلَى مَكَّةَ ائْذَنْ لِي أَيُّهَا الْأَمِيرُ أُحَدِّثْكَ قَوْلًا قَامَ بِهِ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْغَدَ مِنْ يَوْمِ الْفَتْحِ سَمِعَتْهُ أُذُنَايَ وَوَعَاهُ قَلْبِي وَأَبْصَرَتْهُ عَيْنَايَ حِينَ تَكَلَّمَ بِهِ حَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ ثُمَّ قَالَ إِنَّ مَكَّةَ حَرَّمَهَا اللَّهُ وَلَمْ يُحَرِّمْهَا النَّاسُ فَلَا يَحِلُّ لِامْرِئٍ يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ أَنْ يَسْفِكَ بِهَا دَمًا وَلَا يَعْضِدَ بِهَا شَجَرَةً فَإِنْ أَحَدٌ تَرَخَّصَ لِقِتَالِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِيهَا فَقُولُوا إِنَّ اللَّهَ قَدْ أَذِنَ لِرَسُولِهِ وَلَمْ يَأْذَنْ لَكُمْ وَإِنَّمَا أَذِنَ لِي فِيهَا سَاعَةً مِنْ نَهَارٍ ثُمَّ عَادَتْ حُرْمَتُهَا الْيَوْمَ كَحُرْمَتِهَا بِالْأَمْسِ وَلْيُبَلِّغْ الشَّاهِدُ الْغَائِبَ فَقِيلَ لِأَبِي شُرَيْحٍ مَا قَالَ عَمْرٌو قَالَ أَنَا أَعْلَمُ مِنْكَ يَا أَبَا شُرَيْحٍ لَا يُعِيذُ عَاصِيًا وَلَا فَارًّا بِدَمٍ وَلَا فَارًّا بِخَرْبَةٍ

हमें बताया गया है ['अब्दुल्ला बिन यूसुफ] ने कहा,, मुझे बताया गया है [अल लैट्स] ने कहा, मुझे बताया गया है [सईद] वह [अबू स्यूरैह] से अबू सईद का बेटा है कि उसने 'अमरू बिन सईद' से कहा जब उसने मक्का में एक समूह भेजा, "हे अमीर, मुझे एक बात बताने की अनुमति दें जो पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक बार मक्का की मुक्ति के दौरान अपने उपदेश में बताई थी। मेरे दोनों कान सुनते हैं, मेरे दिल ने महसूस किया और मेरी आँखों ने देखा, उन्होंने अल्लाह की प्रशंसा की और अल्लाह को पवित्र किया, कहा: 'वास्तव में, अल्लाह ने मक्का को पवित्र किया है और लोगों (मक्का के मुशरिकों) ने इसे पवित्र नहीं किया है। इसलिए यह किसी के लिए भी वैध नहीं है कि वह अल्लाह और अंतिम दिन में विश्वास करे कि वह इसमें खून बहाए, और किसी के लिए इसमें पेड़ों को उखाड़ना जायज़ नहीं है। तआला ने अपने रसूल को इसकी अनुमति दी है और आप इसे अनुमति न दें।' बेशक, अल्लाह तआला ने मुझे दिन में एक समय इजाज़त दी है और फिर आज इसे उतना ही पवित्र कर दिया है जितना पहले था। तो जो लोग मौजूद हैं, उन्हें इसे उन लोगों तक पहुंचा देना चाहिए जो मौजूद नहीं हैं।" तो अबू स्यूराज से कहा गया, "अमरू ने क्या कहा?" उसने कहा, "मैं तुमसे बेहतर जानता हूँ, ऐ अबू स्यूराज: "वह गुनाह करने वालों, खून बहाने वालों और चोरी करने वालों की हिफ़ाज़त नहीं करेगा।"

समर्थक हदीस :

इमाम अहमद : 15778, 25907, 25911
इमाम बुखारी : 101, 1701, 3957
इमाम मुस्लिम : 2413
इमाम तिर्मिदज़ी : 737, 1326
इमाम नसाई : 2827