Hadith Representative
Kubur menjadi taman dari taman surga atau jurang neraka
Imam Tirmidzi : 2384حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَحْمَدَ بْنِ مَدُّوَيْهِ حَدَّثَنَا الْقَاسِمُ بْنُ الْحَكَمِ الْعُرَنِيُّ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ الْوَلِيدِ الْوَصَّافِيُّ عَنْ عَطِيَّةَ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ قَالَدَخَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مُصَلَّاهُ فَرَأَى نَاسًا كَأَنَّهُمْ يَكْتَشِرُونَ قَالَ أَمَا إِنَّكُمْ لَوْ أَكْثَرْتُمْ ذِكْرَ هَاذِمِ اللَّذَّاتِ لَشَغَلَكُمْ عَمَّا أَرَى فَأَكْثِرُوا مِنْ ذِكْرِ هَاذِمِ اللَّذَّاتِ الْمَوْتِ فَإِنَّهُ لَمْ يَأْتِ عَلَى الْقَبْرِ يَوْمٌ إِلَّا تَكَلَّمَ فِيهِ فَيَقُولُ أَنَا بَيْتُ الْغُرْبَةِ وَأَنَا بَيْتُ الْوَحْدَةِ وَأَنَا بَيْتُ التُّرَابِ وَأَنَا بَيْتُ الدُّودِ فَإِذَا دُفِنَ الْعَبْدُ الْمُؤْمِنُ قَالَ لَهُ الْقَبْرُ مَرْحَبًا وَأَهْلًا أَمَا إِنْ كُنْتَ لَأَحَبَّ مَنْ يَمْشِي عَلَى ظَهْرِي إِلَيَّ فَإِذْ وُلِّيتُكَ الْيَوْمَ وَصِرْتَ إِلَيَّ فَسَتَرَى صَنِيعِيَ بِكَ قَالَ فَيَتَّسِعُ لَهُ مَدَّ بَصَرِهِ وَيُفْتَحُ لَهُ بَابٌ إِلَى الْجَنَّةِ وَإِذَا دُفِنَ الْعَبْدُ الْفَاجِرُ أَوْ الْكَافِرُ قَالَ لَهُ الْقَبْرُ لَا مَرْحَبًا وَلَا أَهْلًا أَمَا إِنْ كُنْتَ لَأَبْغَضَ مَنْ يَمْشِي عَلَى ظَهْرِي إِلَيَّ فَإِذْ وُلِّيتُكَ الْيَوْمَ وَصِرْتَ إِلَيَّ فَسَتَرَى صَنِيعِيَ بِكَ قَالَ فَيَلْتَئِمُ عَلَيْهِ حَتَّى يَلْتَقِيَ عَلَيْهِ وَتَخْتَلِفَ أَضْلَاعُهُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِأَصَابِعِهِ فَأَدْخَلَ بَعْضَهَا فِي جَوْفِ بَعْضٍ قَالَ وَيُقَيِّضُ اللَّهُ لَهُ سَبْعِينَ تِنِّينًا لَوْ أَنْ وَاحِدًا مِنْهَا نَفَخَ فِي الْأَرْضِ مَا أَنْبَتَتْ شَيْئًا مَا بَقِيَتْ الدُّنْيَا فَيَنْهَشْنَهُ وَيَخْدِشْنَهُ حَتَّى يُفْضَى بِهِ إِلَى الْحِسَابِ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّمَا الْقَبْرُ رَوْضَةٌ مِنْ رِيَاضِ الْجَنَّةِ أَوْ حُفْرَةٌ مِنْ حُفَرِ النَّارِقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ لَا نَعْرِفُهُ إِلَّا مِنْ هَذَا الْوَجْهِ
हमरा सब स रिवायत अछि [मुहम्मद बिन अहमद बिन मदुवैह] हमरा सब स रिवायत केने छथि [अल कासिम बिन अल हकम अल उरानी] हमरा सब स रिवायत केने छथि [उबैदुल्लाह बिन अल वलीद अल वशशाफी] [अथियाह] स [अबू सईद] स कहलथि: अल्लाह के रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलाही व सलाम अपन नमाज के जगह पर प्रवेश क लोक के देखलथि, एहन बुझायल जेना ओ सभ हँसैत होथि जाबत धरि दाँत नहि देखाइत होथि, ओ बजलाह: ‘मोन राखू, सत्ते, जँ अहाँ सभ भोगक विनाशक केँ बहुत मोन पाड़ैत छी त’ अहाँ जे देखैत छी से नहि क’ सकब, तेँ सभ भोगक नाश करयवला केँ खूब मोन राखब, सत्ते एहन कोनो दिन नहि होइत अछि जखन अहाँ कोनो कब्र - श्मशान घाट सँ गुजरैत छी - मुदा ओ कहैत अछि: हम एकांतक घर छी, हम एकांतक घर छी, हम घर छी गंदगी, हम कीड़ाक घर छी। जखन कोनो विश्वासी नौकर के अंतिम संस्कार कयल जाइत छैक तखन कब्र ओकरा कहैत छैक: स्वागत अछि, अहाँ हमर पीठ पर चलय वाला छी जे हमरा बेसी नीक लगैत अछि, कारण आब हमरा अहाँ के संभालबाक शक्ति देल गेल अछि आ अहाँ हमरा लग घुरि जाउ, अहाँ देखब जे हम अहाँ के की करब'। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसलाम कहलनि: तखन ओकरा जतेक दूर धरि आँखि देखि सकैत छल, तकरा बढ़ा देल गेल आ स्वर्गक दरबज्जा ओकरा लेल खुजल। आ जखन कोनो नीच वा काफिर नोकर गाड़ल जाइत अछि तखन कब्र ओकरा कहैत छैक : स्वागत नहि, अहाँ ओ छी जे हमर पीठ पर पार करैत छी जिनका सँ हमरा सबसँ बेसी घृणा अछि, कारण आब हमरा अहाँ सँ निपटबाक शक्ति देल गेल अछि आ अहाँ हमरा लग घुरि जाइत छी, अहाँ केँ बुझल होयत जे हम अहाँक की करब'। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसलाम कहलनि: 'तखन कब्र ओकरा ताबत धरि निचोड़ि लेलक जा धरि ओकरा पर नहि लागल जे ओकर हड्डी सब अव्यवस्थित भ' गेलै - अव्यवस्था मे -' -रसूलुल्लाह अपन किछु आँगुर दोसर मे घुसा क' प्रदर्शन केलनि-- अबू सैद कहलनि: रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसलम कहलनि: 'अल्लाह ओकरा सत्तर पैघ साँप देने छथि, जँ ओकरा सभ मे सँ कोनो धरती पर उड़ि जायत तखन धरि निकिया ता धरि किछु नहि उगत जा धरि दुनियाँ एखनो अछि, तखन सभ किछु ओकरा काटि क' घायल क' दैत अछि जाबत धरि ओ हिसाब-किताब नहि क' दैत अछि'। अबू सैद कहलनि: रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसलाम कहलनि: 'वास्तव मे कब्र स्वर्गक बगीचा मे सँ एक अछि वा नरकक गड्ढा मे सँ एक अछि'। अबू ईसा कहलखिन : ई हदीस घरीब अछि, हम सब एकरा केवल एहि सनाद स जनैत छी।