प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 6625
حَدَّثَنَا آدَمُ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ عُمَيْرٍ سَمِعْتُ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ أَبِي بَكْرَةَ قَالَ كَتَبَ أَبُو بَكْرَةَإِلَى ابْنِهِ وَكَانَ بِسِجِسْتَانَ بِأَنْ لَا تَقْضِيَ بَيْنَ اثْنَيْنِ وَأَنْتَ غَضْبَانُ فَإِنِّي سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يَقْضِيَنَّ حَكَمٌ بَيْنَ اثْنَيْنِ وَهُوَ غَضْبَانُ
हमसे कहा है [आदम] ने हमसे कहा है [स्यूबा] ने हमसे कहा है [अब्दुल मलिक बिन उमैर], मैंने [अब्दुर्रहमान बिन अबू बकराह] को कहते सुना, [अबू बकराह] ने अपने बेटे को एक खत लिखा जो उस समय सिजिस्तान में था जिसमें कहा गया था; 'जब तुम गुस्से में हो तो दो लोगों के बीच फैसला मत करो, क्योंकि मैंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते सुना है: "एक जज को गुस्से में दो लोगों के बीच फैसला करने से मना किया गया है।"