हदीस
Amal tergantung pada niatnya, dan setiap orang akan mendapatkan sesuai dengan apa yang diniatkannya
Imam Bukhari : 1حَدَّثَنَا الْحُمَيْدِيُّ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الزُّبَيْرِ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْأَنْصَارِيُّ قَالَ أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيُّ أَنَّهُ سَمِعَ عَلْقَمَةَ بْنَ وَقَّاصٍ اللَّيْثِيَّ يَقُولُ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَلَى الْمِنْبَرِقَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّمَا الْأَعْمَالُ بِالنِّيَّاتِ وَإِنَّمَا لِكُلِّ امْرِئٍ مَا نَوَى فَمَنْ كَانَتْ هِجْرَتُهُ إِلَى دُنْيَا يُصِيبُهَا أَوْ إِلَى امْرَأَةٍ يَنْكِحُهَا فَهِجْرَتُهُ إِلَى مَا هَاجَرَ إِلَيْهِ
हमनी के बतवले बाड़े [अल हुमैदी अब्दुल्लाह बिन अज जुबैर] उ कहले बाड़े, हमनी के बतवले बाड़े [सुफयान] जे कहले बाड़े, कि हमनी के बतवले बाड़े [याह्या बिन सईद अल अंसारी] कहले बाड़े, हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन इब्राहिम एट तैमी], कि उ सुनले बाड़े [अलकामा बिन वकाश अल लैतसी] कहत बाड़े; एक बेर मंच पर [उमर बिन अल खथथब] के कहत सुनले रहनी कि; हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहत सुनले बानी कि हर काम नियत पर निर्भर करेला, आ हर आदमी के इनाम एह बात पर निर्भर करेला कि का इरादा रहे; जेकर इरादा बा कि ऊ जवना दुनिया में पहुँचल चाहत बा भा कवनो मेहरारू से बियाह करे के चाहत बा ओकरा चलते प्रवास करे के बा, त ओकर प्रवास ओही पर होला जवना के इरादा रहे.'