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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



- Ibadah Taubat Ada pintu yang selalu dalam keadaan terbuka untuk taubat dan tidak ditutup hingga matahari terbit dari barat

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Ada pintu yang selalu dalam keadaan terbuka untuk taubat dan tidak ditutup hingga matahari terbit dari barat
Imam Tirmidzi : 3458

حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَاصِمِ بْنِ أَبِي النَّجُودِ عَنْ زِرِّ بْنِ حُبَيْشٍ قَالَأَتَيْتُ صَفْوَانَ بْنَ عَسَّالٍ الْمُرَادِيَّ أَسْأَلُهُ عَنْ الْمَسْحِ عَلَى الْخُفَّيْنِ فَقَالَ مَا جَاءَ بِكَ يَا زِرُّ فَقُلْتُ ابْتِغَاءَ الْعِلْمِ فَقَالَ إِنَّ الْمَلَائِكَةَ لَتَضَعُ أَجْنِحَتَهَا لِطَالِبِ الْعِلْمِ رِضًا بِمَا يَطْلُبُ فَقُلْتُ إِنَّهُ حَكَّ فِي صَدْرِي الْمَسْحُ عَلَى الْخُفَّيْنِ بَعْدَ الْغَائِطِ وَالْبَوْلِ وَكُنْتَ امْرَأً مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَجِئْتُ أَسْأَلُكَ هَلْ سَمِعْتَهُ يَذْكُرُ فِي ذَلِكَ شَيْئًا قَالَ نَعَمْ كَانَ يَأْمُرُنَا إِذَا كُنَّا سَفَرًا أَوْ مُسَافِرِينَ أَنْ لَا نَنْزِعَ خِفَافَنَا ثَلَاثَةَ أَيَّامٍ وَلَيَالِيهِنَّ إِلَّا مِنْ جَنَابَةٍ لَكِنْ مِنْ غَائِطٍ وَبَوْلٍ وَنَوْمٍ فَقُلْتُ هَلْ سَمِعْتَهُ يَذْكُرُ فِي الْهَوَى شَيْئًا قَالَ نَعَمْ كُنَّا مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي سَفَرٍ فَبَيْنَا نَحْنُ عِنْدَهُ إِذْ نَادَاهُ أَعْرَابِيٌّ بِصَوْتٍ لَهُ جَهْوَرِيٍّ يَا مُحَمَّدُ فَأَجَابَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَحْوًا مِنْ صَوْتِهِ هَاؤُمُ فَقُلْنَا لَهُ وَيْحَكَ اغْضُضْ مِنْ صَوْتِكَ فَإِنَّكَ عِنْدَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَدْ نُهِيتَ عَنْ هَذَا فَقَالَ وَاللَّهِ لَا أَغْضُضُ قَالَ الْأَعْرَابِيُّ الْمَرْءُ يُحِبُّ الْقَوْمَ وَلَمَّا يَلْحَقْ بِهِمْ قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْمَرْءُ مَعَ مَنْ أَحَبَّ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فَمَا زَالَ يُحَدِّثُنَا حَتَّى ذَكَرَ بَابًا مِنْ قِبَلِ الْمَغْرِبِ مَسِيرَةُ سَبْعِينَ عَامًا عَرْضُهُ أَوْ يَسِيرُ الرَّاكِبُ فِي عَرْضِهِ أَرْبَعِينَ أَوْ سَبْعِينَ عَامًاقَالَ سُفْيَانُ قِبَلَ الشَّامِ خَلَقَهُ اللَّهُ يَوْمَ خَلَقَ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضَ مَفْتُوحًا يَعْنِي لِلتَّوْبَةِ لَا يُغْلَقُ حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ مِنْهُ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ

हमरा सब के कहलक अछि [इब्न अबू उमर] हमरा सब के [सुफयान] ['अशिम बिन अबू अन नजुद] स [जिरर बिन हुबैसी] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम [शफवान बिन अस्सल अल मुरादी] लग आबि गेलहुँ जे हुनकासँ जूता पोछबाक विषयमे पुछलनि । तखन ओ कहलनि; की अनने छी जिरर? हम कहलियनि; ज्ञान प्राप्ति के इच्छा। तखन ओ कहलनि; सचमुच, ज्ञानक खोज करय वाला के लेल स्वर्गदूत अपन पाँखि लगा दैत छथिन, कारण ओ जे ज्ञान चाहैत छथि ताहि सं प्रसन्न होइत छथि | तखन हम कहलियनि; असल मे हमरा मोन मे आयल जे शौच आ पेशाब केलाक बाद जूता पोछबाक समस्या, जखन कि अहाँ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दोस्त छी, त हम अहाँ स पूछय लेल आयल छलहुं, की अहाँ कहियो हुनका एहि बारे मे किछु जिक्र केने सुनने छी? ओ कहलनि; हँ। ओ हमरा सभकेँ आदेश देलनि जे जखन हम सभ तीर्थ यात्रा पर रही तखन जुनब छोड़ि तीन दिन तीन राति धरि जूता नहि उतारब, अपितु शौच आ पेशाब आ सुतब लेल। हम कहैत छी; हुनका काम-वासना के बारे में कोनो बात सुनलौं? ओ कहलनि; हँ। हम एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संग यात्रा पर छलहुं, तखने हम सब हुनकर बगल में छलहुं अचानक एकटा बेदुइन जोर सं आवाज देलक; हे मुहम्मद ! तखन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका आवाज जकाँ जवाब देलखिन: 'की अछि?' तखन हम सभ हुनका कहलियनि; हाय तोरा, आवाज कम करू! सचमुच, अहाँ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पक्ष में छी, आ अहाँ के ई करब मना कयल गेल अछि। बेदुइन कहलक; जे कोनो लोकसँ प्रेम करै छै, मुदा ओकरासँ भेंट नै भेलै ओकर की भाग्य छै। नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहने छथि : 'एक व्यक्ति कयामत के दिन ओहि व्यक्ति के संग रहत जेकरा ओ प्रेम करैत अछि'। ओ हमरा सभकेँ ताबत धरि खिस्सा कहैत रहलाह जाबत धरि पश्चिम दिसक एकटा दरबज्जाक जिक्र नहि केलनि जे सत्तरि वर्षक यात्रा छल, वा जँ कोनो सवार चालीस-सत्तरि वर्षक यात्रा छल । सुफियन बजलाह; दरबज्जा शाम दिस अछि, अल्लाह ओहि दिन एकरा बनौने छलाह जहिया ओ आकाश आ धरती बनौलनि, दरबज्जा पश्चाताप लेल खुजल अछि आ जा धरि पश्चिम सँ सूर्य नहि उगैत अछि ता धरि बंद नहि होइत अछि | अबू ईसा कहलनि; ई हदीस एकटा प्रामाणिक हसन हदीस अछि।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 7386, 8767, 9144, 10016, 10176, 11500, 21990
Imam Muslim : 4872
Imam Tirmidzi : 3458, 3459