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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



- Minuman Adab Minum Larangan minum dengan tangan kiri, karena setan makan dan minum dengan tangan kiri
हदीस :
हदीस : 1
हदीस
Larangan minum dengan tangan kiri, karena setan makan dan minum dengan tangan kiri
Imam Tirmidzi : 1721

حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَأْكُلْ أَحَدُكُمْ بِشِمَالِهِ وَلَا يَشْرَبْ بِشِمَالِهِ فَإِنَّ الشَّيْطَانَ يَأْكُلُ بِشِمَالِهِ وَيَشْرَبُ بِشِمَالِهِقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ جَابِرٍ وَعُمَرَ بْنِ أَبِي سَلَمَةَ وَسَلَمَةَ بْنِ الْأَكْوَعِ وَأَنَسِ بْنِ مَالِكٍ وَحَفْصَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَهَكَذَا رَوَى مَالِكٌ وَابْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ ابْنِ عُمَرَ وَرَوَى مَعْمَرٌ وَعُقَيْلٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَالِمٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ وَرِوَايَةُ مَالِكٍ وَابْنُ عُيَيْنَةَ أَصَحُّ

इ हमनी के [इशहाक बिन मंसूर] के बतवले बा, हमनी के [अब्दुल्लाह बिन नुमैर] बता देले बा, इ हमनी के [उबैदुल्लाह बिन उमर] से [इब्न शिहाब] से [अबू बकर बिन उबैदुल्लाह बिन उमर] से [अब्दुल्लाह बिन उमर] से बतवले बा कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर कहले रहले कि: 'तू में से केहु अपना बाईं ओर से ना खाए।' हाथ ना बायां हाथ से पीयेला, काहे कि सचमुच शैतान बायां हाथ से खात-पीयत बा'। एह अध्याय में जाबिर, उमर बिन सलामाह बिन अल अकवा', अनस बिन मलिक आ हफशाह से भी इतिहास बा। अबू ईसा कहले कि; ई हसन सहीह हदीस ह। ठीक ओसही एकरा के [मलिक] अवुरी [इब्नु उयैनह] [अज ज़ुहरी] से [अबू बकर बिन उबैदुल्लाह] से, [इब्न उमर] से रिवायत कईले बाड़े। [मा'मर] आ [उकाइल] भी [अज जुहरी] से [सलीम] से [इब्न उमर] से रिवायत कइले बाड़न। हालांकि मलिक आ इब्न उयना के इतिहास अधिका प्रामाणिक बा।

हदीस :

Imam Ahmad : 4309, 4654, 5257, 5583, 5843, 5908, 6050, 7955, 8235, 14060, 14327, 14620, 18605, 21584, 21604
Imam Muslim : 3763, 3764, 3765
Imam Abu Dawud : 3283
Imam Tirmidzi : 1721, 1722
Imam Ibnu Majah : 3257, 3259
Imam Malik : 1439
Imam Darimi : 1944