प्रतिनिधि हदीस
इमाम अबू दाऊद : 2008
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ بْنُ زِيَادٍ عَنْ عَاصِمٍ الْأَحْوَلِ عَنْ حَفْصَةَ بِنْتِ سِيرِينَ عَنْ الرَّبَابِ عَنْ سَلْمَانَ بْنِ عَامِرٍ عَمِّهَا قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا كَانَ أَحَدُكُمْ صَائِمًا فَلْيُفْطِرْ عَلَى التَّمْرِ فَإِنْ لَمْ يَجِدْ التَّمْرَ فَعَلَى الْمَاءِ فَإِنَّ الْمَاءَ طَهُورٌ
हमें [मुसद्दद] ने बताया है, हमें [अब्दुल वाहिद बिन ज़ियाद] ने ['आशिम अल अहवाल] से, [हफ़्शाह बिन्त सिरीन] ने [अर रबाब] से [सलमान बिन 'अमीर जो उनके चाचा हैं] से बताया है, उन्होंने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जब तुम में से कोई रोज़ा रखे, तो उसे खजूर से अपना रोज़ा खोलना चाहिए, अगर उसे खजूर न मिले, तो उसे पानी से खोलना चाहिए, क्योंकि पानी ज़रूर (ज़ाहिर और दिल को साफ़ करता है, या प्यास मिटाता है)।"