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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



- Akhlak Mulia Prasangka Baik kepada Muslim Nabi mengampuni Hathib meskipun berkhianat membocorkan rencana Nabi kepada musyrikin karena menghargai peserta perang Badar

हदीस :
हदीस : 1
हदीस
Nabi mengampuni Hathib meskipun berkhianat membocorkan rencana Nabi kepada musyrikin karena menghargai peserta perang Badar
Imam Tirmidzi : 3227

حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ عَنْ الْحَسَنِ بْنِ مُحَمَّدٍ هُوَ ابْنُ الْحَنَفِيَّةِ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي رَافِعٍ قَال سَمِعْتُ عَلِيَّ بْنَ أَبِي طَالِبٍ يَقُولُبَعَثَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَا وَالزُّبَيْرَ وَالْمِقْدَادَ بْنَ الْأَسْوَدِ فَقَالَ انْطَلِقُوا حَتَّى تَأْتُوا رَوْضَةَ خَاخٍ فَإِنَّ فِيهَا ظَعِينَةً مَعَهَا كِتَابٌ فَخُذُوهُ مِنْهَا فَأْتُونِي بِهِ فَخَرَجْنَا تَتَعَادَى بِنَا خَيْلُنَا حَتَّى أَتَيْنَا الرَّوْضَةَ فَإِذَا نَحْنُ بِالظَّعِينَةِ فَقُلْنَا أَخْرِجِي الْكِتَابَ فَقَالَتْ مَا مَعِي مِنْ كِتَابٍ فَقُلْنَا لَتُخْرِجِنَّ الْكِتَابَ أَوْ لَتُلْقِيَنَّ الثِّيَابَ قَالَ فَأَخْرَجَتْهُ مِنْ عِقَاصِهَا قَالَ فَأَتَيْنَا بِهِ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَإِذَا هُوَ مِنْ حَاطِبِ بْنِ أَبِي بَلْتَعَةَ إِلَى نَاسٍ مِنْ الْمُشْرِكِينَ بِمَكَّةَ يُخْبِرُهُمْ بِبَعْضِ أَمْرِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ مَا هَذَا يَا حَاطِبُ قَالَ لَا تَعْجَلْ عَلَيَّ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي كُنْتُ امْرَأً مُلْصَقًا فِي قُرَيْشٍ وَلَمْ أَكُنْ مِنْ أَنْفُسِهَا وَكَانَ مَنْ مَعَكَ مِنْ الْمُهَاجِرِينَ لَهُمْ قَرَابَاتٌ يَحْمُونَ بِهَا أَهْلِيهِمْ وَأَمْوَالَهُمْ بِمَكَّةَ فَأَحْبَبْتُ إِذْ فَاتَنِي ذَلِكَ مِنْ نَسَبٍ فِيهِمْ أَنْ أَتَّخِذَ فِيهِمْ يَدًا يَحْمُونَ بِهَا قَرَابَتِي وَمَا فَعَلْتُ ذَلِكَ كُفْرًا وَلَا ارْتِدَادًا عَنْ دِينِي وَلَا رِضًا بِالْكُفْرِ بَعْدَ الْإِسْلَامِ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صَدَقَ فَقَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ دَعْنِي يَا رَسُولَ اللَّهِ أَضْرِبْ عُنُقَ هَذَا الْمُنَافِقِ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّهُ قَدْ شَهِدَ بَدْرًا فَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّ اللَّهَ اطَّلَعَ عَلَى أَهْلِ بَدْرٍ فَقَالَ اعْمَلُوا مَا شِئْتُمْ فَقَدْ غَفَرْتُ لَكُمْ قَالَ وَفِيهِ أُنْزِلَتْ هَذِهِ السُّورَةُ{ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَتَّخِذُوا عَدُوِّي وَعَدُوَّكُمْ أَوْلِيَاءَ }السُّورَةَقَالَ عَمْرٌو وَقَدْ رَأَيْتُ ابْنَ أَبِي رَافِعٍ وَكَانَ كَاتِبًا لِعَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَفِيهِ عَنْ عُمَرَ وَجَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ وَرَوَى غَيْرُ وَاحِدٍ عَنْ سُفْيَانَ بْنِ عُيَيْنَةَ هَذَا الْحَدِيثَ نَحْوَ هَذَا وَذَكَرُوا هَذَا الْحَرْفَ وَقَالُوا لَتُخْرِجِنَّ الْكِتَابَ أَوْ لَتُلْقِيَنَّ الثِّيَابَ وَقَدْ رُوِيَ أَيْضًا عَنْ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ السُّلَمِيِّ عَنْ عَلِيٍّ نَحْوَ هَذَا الْحَدِيثِ ذَكَرَ بَعْضُهُمْ فِيهِ فَقَالَ لَتُخْرِجِنَّ الْكِتَابَ أَوْ لَنُجَرِّدَنَّكِ

हमनी के बतवले बा [इब्न अबू उमर] हमनी के [सुफियान] से ['अमर बिन दिनार] से [अल हसन बिन मुहम्मद यानी अल हनाफीयाह] से ['उबैदुल्लाह बिन अबू रफी'] से बतवले बाड़े, उ कहले; हम [अली बिन अबू तालिब] के कहत सुनले बानी; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमनी के भेजले बाड़े, यानी कि हम, अज़ जुबैर, अवुरी अल मिकदाद बिन अल असवद। उ कहले कि जब तक रौदह खख नाम के जगह ना पहुंचब तब तक जा, काहे कि सचमुच एगो महिला चिट्ठी लेके चलत बाड़ी, त ओकरा से लेके हमरा लगे ले आईं’। फेर हमनी के बाहर निकलनी जा आ हमनी के घोड़ा सरपट दौड़त रहे जबले हमनी के रौधाह खाह ना पहुँचनी जा, आ लागत बा कि हमनी के एगो मेहरारू से भेंट भइल, तब हम कहनी; चिट्ठी के बाहर निकाल लीं! तब ऊ मेहरारू कहलस; चिट्ठी ना ले अइनी। तब हम कहत बानी; का रउवा सचमुच चिट्ठी निकालले बानी कि कपड़ा उतारले बानी! अली कहले कि; तब मेहरारू अपना लट बाल से चिट्ठी निकाल लिहलस -बन, बन-। अली कहले कि; तब हम ओह औरत के अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे पकड़ लेहनी आ पता चलल कि हथिब बिन अबू बलताआ के चिट्ठी मक्का के मुश्रिकन के रहे, उ ओह लोग के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कुछ मामिला के जानकारी दिहले। तब कहलन- ई का हथब? हथीब कहले: हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हमरा के निंदा करे में जल्दबाजी मत करीं! सचहूँ हम एगो अइसन व्यक्ति रहनी जे कुरैश लोग के बीच रहत रहनी आ ओह लोग के वंशज से ना रहनी जबकि प्रवासी लोग में से रउरा साथे रहे वाला लोग के रिश्तेदार रहले जवना से ऊ लोग मक्का में अपना परिवार आ संपत्ति के रक्षा करत रहे. आ हम चाहत रहनी कि जब हमरा ओह लोग से कवनो वंश ना रहे त अइसन काम करीं जवना से ऊ लोग हमार रिश्तेदारी बनवले राख सके आ हम अइसन एहसे ना कइनी कि हम काफिर हईं भा आपन धर्म छोड़ दिहले रहीं भा इस्लाम के आगमन का बाद काफिर से खुश रहनी. तब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि उ सही कहतारे। तब उमर बिन अल खथाब, अल्लाह उनुका से खुश होखस, कहले; हम एह पाखंडी के गर्दन काट देनी, हे अल्लाह के रसूलुल्लाह! तब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले: 'वास्तव में उ बदर के लड़ाई में भाग लेले रहले, का रउवा जानत बानी कि संभव बा कि अल्लाह बदर विशेषज्ञ के ओर देखले होईहे अवुरी कहले होईहे कि, 'रउरा जइसन मन करे, सचमुच हम आपके पाप माफ क देले होखब?'। अली कहले कि; तब हथिब बिन अबू बलताअह के बारे में ई चिट्ठी उतरल: 'हे विश्वास करे वाला लोग, हमरा दुश्मनन आ अपना दुश्मनन के वफादार दोस्त मत बनाईं'। -क्यूएस के बा। अल्मुमतांगनह 1-, 'अमर कहले; जहाँ तक हमरा मालूम बा इब्न अबू रफी' अली बिन अबू तालिब के सचिव रहले। इ हदीस हसन सहीह हदीस ह, अवुरी उमर अवुरी जाबिर बिन अब्दुल्ला के ह, अवुरी सिर्फ एक आदमी सूफियान बिन उयैना से ए हदीस के अयीसन नईखन बतवले। आ ऊ लोग एह संपादकीय से कहल कि का रउरा सचहूँ चिट्ठी निकालब कि कपड़ा उतारब! आ [अबू अब्दुर रहमान अस सुलामी] से भी [अली] से एह हदीस के तरह रिवायत भइल बा, ओहमें से कुछ लोग उनुका से कहले बा कि: वाकई तू चिट्ठी जारी करऽ ना त हमनी के तोहार कपड़ा उतार देब जा।

हदीस :

Imam Ahmad : 786, 5611, 7599, 14247
Imam Bukhari : 2785, 2851, 3684, 3939, 4511
Imam Muslim : 4550
Imam Abu Dawud : 4035
Imam Tirmidzi : 3227
Imam Darimi : 2643