प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 1914
حَدَّثَنَا قَبِيصَةُ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ طَلْحَةَ عَنْ أَنَسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَمَرَّ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِتَمْرَةٍ مَسْقُوطَةٍ فَقَالَ لَوْلَا أَنْ تَكُونَ مِنْ صَدَقَةٍ لَأَكَلْتُهَاوَقَالَ هَمَّامٌ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَجِدُ تَمْرَةً سَاقِطَةً عَلَى فِرَاشِي
हमें बताया गया है कि [क़बीशाह] ने हमें [सुफ़यान] से [मंसूर] से [थोलहा] से [अनस रदियल्लाहु अन्हु] तक बताया है: पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम गिरी हुई खजूर के पास से गुज़रे, फिर उन्होंने कहा: "अगर ये खजूर शदका (ज़कात) के लिए अनिवार्य नहीं होते तो मैं उन्हें खा लेता।" और कहा, [हम्माम] [अबू हुरैरा रदियल्लाहु अन्हु] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "मुझे खजूर मिले जो मेरे बिस्तर पर गिर गए थे"।