हदीस
Menyembelih
Imam Tirmidzi : 811حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ الزُّبَيْرِيُّ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْحَارِثِ بْنِ عَيَّاشِ بْنِ أَبِي رَبِيعَةَ عَنْ زَيْدِ بْنِ عَلِيٍّ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي رَافِعٍ عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَوَقَفَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِعَرَفَةَ فَقَالَ هَذِهِ عَرَفَةُ وَهَذَا هُوَ الْمَوْقِفُ وَعَرَفَةُ كُلُّهَا مَوْقِفٌ ثُمَّ أَفَاضَ حِينَ غَرَبَتْ الشَّمْسُ وَأَرْدَفَ أُسَامَةَ بْنَ زَيْدٍ وَجَعَلَ يُشِيرُ بِيَدِهِ عَلَى هِينَتِهِ وَالنَّاسُ يَضْرِبُونَ يَمِينًا وَشِمَالًا يَلْتَفِتُ إِلَيْهِمْ وَيَقُولُ يَا أَيُّهَا النَّاسُ عَلَيْكُمْ السَّكِينَةَ ثُمَّ أَتَى جَمْعًا فَصَلَّى بِهِمْ الصَّلَاتَيْنِ جَمِيعًا فَلَمَّا أَصْبَحَ أَتَى قُزَحَ فَوَقَفَ عَلَيْهِ وَقَالَ هَذَا قُزَحُ وَهُوَ الْمَوْقِفُ وَجَمْعٌ كُلُّهَا مَوْقِفٌ ثُمَّ أَفَاضَ حَتَّى انْتَهَى إِلَى وَادِي مُحَسِّرٍ فَقَرَعَ نَاقَتَهُ فَخَبَّتْ حَتَّى جَاوَزَ الْوَادِيَ فَوَقَفَ وَأَرْدَفَ الْفَضْلَ ثُمَّ أَتَى الْجَمْرَةَ فَرَمَاهَا ثُمَّ أَتَى الْمَنْحَرَ فَقَالَ هَذَا الْمَنْحَرُ وَمِنًى كُلُّهَا مَنْحَرٌ وَاسْتَفْتَتْهُ جَارِيَةٌ شَابَّةٌ مِنْ خَثْعَمٍ فَقَالَتْ إِنَّ أَبِي شَيْخٌ كَبِيرٌ قَدْ أَدْرَكَتْهُ فَرِيضَةُ اللَّهِ فِي الْحَجِّ أَفَيُجْزِئُ أَنْ أَحُجَّ عَنْهُ قَالَ حُجِّي عَنْ أَبِيكِ قَالَ وَلَوَى عُنُقَ الْفَضْلِ فَقَالَ الْعَبَّاسُ يَا رَسُولَ اللَّهِ لِمَ لَوَيْتَ عُنُقَ ابْنِ عَمِّكَ قَالَ رَأَيْتُ شَابًّا وَشَابَّةً فَلَمْ آمَنْ الشَّيْطَانَ عَلَيْهِمَا ثُمَّ أَتَاهُ رَجُلٌ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي أَفَضْتُ قَبْلَ أَنْ أَحْلِقَ قَالَ احْلِقْ أَوْ قَصِّرْ وَلَا حَرَجَ قَالَ وَجَاءَ آخَرُ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي ذَبَحْتُ قَبْلَ أَنْ أَرْمِيَ قَالَ ارْمِ وَلَا حَرَجَ قَالَ ثُمَّ أَتَى الْبَيْتَ فَطَافَ بِهِ ثُمَّ أَتَى زَمْزَمَ فَقَالَ يَا بَنِي عَبْدِ الْمُطَّلِبِ لَوْلَا أَنْ يَغْلِبَكُمْ النَّاسُ عَنْهُ لَنَزَعْتُقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ جَابِرٍ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَلِيٍّ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ لَا نَعْرِفُهُ مِنْ حَدِيثِ عَلِيٍّ إِلَّا مِنْ هَذَا الْوَجْهِ مِنْ حَدِيثِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْحَارِثِ بْنِ عَيَّاشٍ وَقَدْ رَوَاهُ غَيْرُ وَاحِدٍ عَنْ الثَّوْرِيِّ مِثْلَ هَذَا وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا عِنْدَ أَهْلِ الْعِلْمِ رَأَوْا أَنْ يُجْمَعَ بَيْنَ الظُّهْرِ وَالْعَصْرِ بِعَرَفَةَ فِي وَقْتِ الظُّهْرِ و قَالَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ إِذَا صَلَّى الرَّجُلُ فِي رَحْلِهِ وَلَمْ يَشْهَدْ الصَّلَاةَ مَعَ الْإِمَامِ إِنْ شَاءَ جَمَعَ هُوَ بَيْنَ الصَّلَاتَيْنِ مِثْلَ مَا صَنَعَ الْإِمَامُ قَالَ وَزَيْدُ بْنُ عَلِيٍّ هُوَ ابْنُ حُسَيْنِ بْنِ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ عَلَيْهِ السَّلَام
हमनी के बतवले बा [मुहम्मद बिन बस्यार], बतवले बा [अबू अहमद अज जुबैरी] हमनी के [सुफयान] से [अब्दुररहमान बिन अल हरिथ बिन अय्यासी बिन अबू रबियाह] से [जैद बिन अली] से [उनकर पिता] से ['उबैदुल्लाह बिन अबू रफी'] से [अली बिन अबू तालिब] से कहले बाड़े; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम वकुफ अराफात में आ उ कहले; 'ई अराफात ह आ इहे वकुफ के जगह ह।' पूरा अराफात वकुफ के जगह ह। फेर सूर्यास्त के समय उसामाह बिन जैद के लेके चल गईले अवुरी हाथ से संकेत देके अपना सामान्य हालत में रहे के। जबकि लोग दाहिने बाईं ओर बढ़ेला। ऊ ओह लोग के ओर मुड़ के कहले- हे लोग! एकरा के धीरे-धीरे ले लीं'। फिर जामा' -अरफा- पहुंचले, फिर उ लोग के साथे दु नमाज में शामिल हो गईले। सबेरे ऊ कुजाह में अइले, फेर उहाँ वकुफ, कहत रहले; 'ई कुजाह ह।' ई जगह वकुफ के जगह ह आ जामा' सब वकुफ के जगह ह। फेर वाडी मुहसीर खातिर रवाना होके ऊ अपना ऊंट के तेज कइलन, जबले कि उनकर ऊंट तबले चलत रहल जबले ऊ घाटी से ना गुजरल. ऊ रुक के अल फडल के गुल्लक के सवारी दे दिहले. फेरु जुमरा में आके फेंक दिहलस। तब ऊ वध के जगह पर जाके कहले; 'ई वध के जगह ह आ मीना सब वध के जगह ह'। ओह घरी खटस'म के एगो युवती कुछ पूछलस; 'हमार बाबूजी बूढ़ बाड़े, लेकिन हज करे के बाध्यता हो गईल बाड़े।' का हम ओकरा खातिर हज बना सकेनी? ' उ जवाब दिहले: 'अपना बाबूजी खातिर हज बनाईं'। -अली बिन अबू तालिब- कहले कि; 'उ अल फडल के गर्दन घुमा दिहले।' अल अब्बास पूछले कि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, तू अपना चाचा के बेटा के सिर काहे घुमा देले बाड़ू? ' उ जवाब दिहले: 'हम एगो युवक अवुरी एगो युवती के देखनी, एहसे हम शैतान से सुरक्षित ना महसूस कईनी -जवन कि- दुनो में रहे'। अचानक एगो आदमी आके कहलस; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, का हम मुंडन से पहिले तवाफ इफादला कईले रहनी? ' ऊ जवाब दिहले: 'मुंडन करऽ भा छोट करऽ - अब - आ एकरा से कवनो फर्क नइखे पड़त''। -अली बिन अबू तालिब- कहले कि; 'तब एगो अउरी आके पूछलस; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, का हम -जुमरा- फेंके से पहिले कत्ल कइले बानी? ' ऊ जवाब दिहले: 'फेंक दीं - अब - ठीक बा''। -अली बिन अबू तालिब- कहले कि; 'फिर ऊ काबा में जाके तवाफ कइलन, फेर ज़मज़म के पानी में गइलन, ई कह के; 'हे बानू अब्दुल मुत्तलिब, अगर हमरा लोग के भीड़ से ना डेरात - काहे कि ओह लोग के मनसिक के मानल जात रहे - त हम ओह लोग के पानी देले रहतीं - जइसे कि रउरा कइले बानी -'. -अबू ईसा तिरमिधी में- कहले; 'सबसे सार्थक हदीस जाबीर से रिवायत भईल बा'। अबू ईसा कहले कि; 'अली के हदीस हसन के प्रामाणिक हदीस ह, अली के हदीस के बारे में हमनी के ए रास्ता के छोड़ के नईखे मालूम। अब्दुररहमान बिन अल हरिथ बिन अय्यासी के हदीस से। एक से अधिका लोग एकरा के अतस त्साउरी से बतवले बा, जइसे कि ऊपर के हदीस। उलमा लोग के अमल में सब लोग के राय बा कि धुहूर के समय अराफात प केहु के झूहर अवुरी असर कईल जायज बा। कुछ विद्वान लोग कहेला कि; 'अगर कवनो आदमी अपना वाहन में अकेले नमाज पढ़ेला, बिना इमाम के संगे नमाज जोड़ले, त उ इमाम से जुड़ सकता'। जैद बिन अली इब्नू हुसैन बिन अली बिन अबू तालिब' हवें।