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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



- Haji dan Umrah Ihram (tanggal 8 Dzulhijjah) Ihlal

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Ihlal
Imam Ahmad : 2240

حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ حَدَّثَنَا أَبِي عَنِ ابْنِ إِسْحَاقَ حَدَّثَنَا خُصَيْفُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْجَزَرِيُّ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ قَالَ قُلْتُ لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ يَا أَبَا الْعَبَّاسِ عَجَبًا لِاخْتِلَافِ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي إِهْلَالِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ أَوْجَبَ فَقَالَ إِنِّي لَأَعْلَمُ النَّاسِ بِذَلِكَ إِنَّهَا إِنَّمَا كَانَتْ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَجَّةً وَاحِدَةً فَمِنْ هُنَالِكَ اخْتَلَفُوا خَرَجَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَاجًّا فَلَمَّا صَلَّى فِي مَسْجِدِهِ بِذِي الْحُلَيْفَةِ رَكْعَتَيْهِ أَوْجَبَ فِي مَجْلِسِهِ فَأَهَلَّ بِالْحَجِّ حِينَ فَرَغَ مِنْ رَكْعَتَيْهِ فَسَمِعَ ذَلِكَ مِنْهُ أَقْوَامٌ فَحَفِظُوا عَنْهُ ثُمَّ رَكِبَ فَلَمَّا اسْتَقَلَّتْ بِهِ نَاقَتُهُ أَهَلَّ وَأَدْرَكَ ذَلِكَ مِنْهُ أَقْوَامٌ وَذَلِكَ أَنَّ النَّاسَ إِنَّمَا كَانُوا يَأْتُونَ أَرْسَالًا فَسَمِعُوهُ حِينَ اسْتَقَلَّتْ بِهِ نَاقَتُهُ يُهِلُّ فَقَالُوا إِنَّمَا أَهَلَّ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ اسْتَقَلَّتْ بِهِ نَاقَتُهُ ثُمَّ مَضَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلَمَّا عَلَا عَلَى شَرَفِ الْبَيْدَاءِ أَهَلَّ وَأَدْرَكَ ذَلِكَ مِنْهُ أَقْوَامٌ فَقَالُوا إِنَّمَا أَهَلَّ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ عَلَا عَلَى شَرَفِ الْبَيْدَاءِ وَايْمُ اللَّهِ لَقَدْ أَوْجَبَ فِي مُصَلَّاهُ وَأَهَلَّ حِينَ اسْتَقَلَّتْ بِهِ نَاقَتُهُ وَأَهَلَّ حِينَ عَلَا عَلَى شَرَفِ الْبَيْدَاءِ فَمَنْ أَخَذَ بِقَوْلِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ أَهَلَّ فِي مُصَلَّاهُ إِذَا فَرَغَ مِنْ رَكْعَتَيْهِ

हमरा सब के कहलक अछि [या'कुब] हमरा सब के [हमर पिता] के [इब्न इशक] स कहलक अछि [खुशैफ बिन अब्दुररहमान अल जजारी] स [सईद बिन जुबैर] स कहलक अछि; हम [इब्न अब्बास] केँ कहलियनि; 'हे इब्न अब्बास, ई सचमुच आश्चर्य के बात छै कि रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम के साथी के बीच रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम के इहलाल के संबंध में विवाद - इहराम के नियत से शुरू करना - जब कि हुनका एकरऽ आवश्यकता छेलै' । ओ कहलनि; 'असल मे हम ओ व्यक्ति छी जे एहि विषय मे बेसी जनैत छी।' सचमुच नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स एकटा हज छल, फेर ओतय स अलग छल। रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हज करय लेल निकललाह, जखन ओ ज़ुलहुलेइफा मे अपन मस्जिद मे दू रकाअत के नमाज पढ़लनि त ओ अपन सभा के लेल फर्ज क देलखिन्ह, जे एक बेर दू रकाअत पूरा क लेलखिन्ह त हज के नमाज क देलखिन्ह. लोक सभ ई बात सोझे हुनका सँ सुनलक आ हुनका सभ केँ ई बात मोन पड़लनि, तखन ओ अपन माउंट पर चढ़ि गेलाह | ओकर ऊँट गेलाक बाद ओ अपन इहलाल -इरादा- बनौलनि, आ ई बात कतेको लोक केँ बुझल छलनि, एकर कारण छल जे लोक धीरे-धीरे अबैत छल, जाहि सँ ओ सभ सुनैत छल जे जखन ओकर ऊँट चलि गेल तखन ओकर इहलाल -इरादा- बनबैत छल, तेँ ओ सभ कहलक; 'सत्ते, अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केरऽ इरादा छेलै - जब॑ ओकरऽ ऊंट चली गेलै' । तखन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम चललाह, आ जखन ओ बैदा` के समानांतर छलाह त हुनकर इरादा छलनि - आ ई बात कतेको लोक के पता छलनि | तखन ओ सभ कहलथिन; 'सत्ते, रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के इरादा छल -जखन हुनकर ऊंट बैदा के समानांतर छल''. अल्लाह के कसम, ओ वास्तव में नमाज के जगह पर एकरा फर्ज क देलखिन, आ ओकर इरादा छल जे जखन ओकर ऊंट चलि जायत तखन ओ ई काज करत, ओकर इरादा सेहो छल जे बैदा के स्तर पर पहुंचला पर ई काज करत। जे अब्दुल्ला बिन अब्बास के बात के पालन करत ओ अपन दू रकाअत पूरा करैत देरी नमाज के जगह पर हलाल - इरादा - करत।

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