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Tingkatan rezeki dan shadaqah dulu dan sekarang
Imam Bukhari : 1327حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا أَبِي حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ شَقِيقٍ عَنْ أَبِي مَسْعُودٍ الْأَنْصَارِيِّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا أَمَرَنَا بِالصَّدَقَةِ انْطَلَقَ أَحَدُنَا إِلَى السُّوقِ فَيُحَامِلُ فَيُصِيبُ الْمُدَّ وَإِنَّ لِبَعْضِهِمْ الْيَوْمَ لَمِائَةَ أَلْفٍ
हमसे कहा गा है [सैद बिन यह्या] हमसे कहिन है [मेरे पिता] हमसे [अल अमासी] से [स्याक] से [अबू मस'उद अल अंशारी रदलियाअल्लाहु अनहू] से कहिन है,: 'जब पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम हमका शादाका देवे का आदेश दिहिन, तब हममें से एक बाजार मा जात रहा अऊर तब तक उ सबसे जल्दी काम करत रहा। एक कीचड़ का भाग्य। जहाँ तक आज के बात है, ओनमा से कुछ लोग एक लाख गुना कमा सकत हैं'।