प्रतिनिधि हदीस
इमाम नसाई : 2438
أَخْبَرَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ مَسْعُودٍ قَالَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ قَالَ حَدَّثَنَا رَوْحُ بْنُ الْقَاسِمِ قَالَ حَدَّثَنِي عَمْرُو بْنُ يَحْيَى بْنِ عُمَارَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّعَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَحِلُّ فِي الْبُرِّ وَالتَّمْرِ زَكَاةٌ حَتَّى تَبْلُغَ خَمْسَةَ أَوْسُقٍ وَلَا يَحِلُّ فِي الْوَرِقِ زَكَاةٌ حَتَّى تَبْلُغَ خَمْسَةَ أَوَاقٍ وَلَا يَحِلُّ فِي إِبِلٍ زَكَاةٌ حَتَّى تَبْلُغَ خَمْسَ ذَوْدٍ
हमें [इस्माईल बिन मसूद] ने बताया है; उन्होंने कहा; हमें बताया है [यज़ीद बिन ज़ुराई] ने कहा; हमें बताया है [रौह बिन अल कासिम] ने कहा; मुझे [अमरू बिन यह्या बिन उमराह] ने [अपने पिता] से [अबू सईद अल खुदरी] से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बताया है, उन्होंने कहा: "गेहूँ और खजूर पर ज़कात देना हलाल नहीं है जब तक वह पाँच वसुक़ तक न पहुँच जाए, चाँदी पर ज़कात देना हलाल नहीं है जब तक वह पाँच उक़िया तक न पहुँच जाए और ऊँटों पर ज़कात देना हलाल नहीं है जब तक वह पाँच सिरों तक न पहुँच जाए।"