प्रतिनिधि हदीस
इमाम इब्नु माजा : 1721
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَمْزَةَ عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ عِيَاضِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ عَنْ قَتَادَةَ بْنِ النُّعْمَانِ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ صَامَ يَوْمَ عَرَفَةَ غُفِرَ لَهُ سَنَةٌ أَمَامَهُ وَسَنَةٌ بَعْدَهُ
हज़रत हिसाम बिन अम्मार ने कहा, हज़रत याह्या बिन हमज़ा ने इसहाक बिन अब्दुल्लाह से कहा, इयादल बिन अब्दुल्लाह से अबू सईद अल खुदरी से क़तादा बिन अन नुमान से कहा; मैंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते सुना: "जो कोई भी अराफ़ात का रोज़ा रखेगा, उसके आने वाले साल और पिछले साल के गुनाह माफ़ कर दिए जाएँगे।"