हदीस
Kalimat talbiyah termasuk kalimat tauhid
Imam Tirmidzi : 755حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ عَنْ أَيُّوبَ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَأَنَّ تَلْبِيَةَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَتْ لَبَّيْكَ اللَّهُمَّ لَبَّيْكَ لَبَّيْكَ لَا شَرِيكَ لَكَ لَبَّيْكَ إِنَّ الْحَمْدَ وَالنِّعْمَةَ لَكَ وَالْمُلْكَ لَا شَرِيكَ لَكَقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ ابْنِ مَسْعُودٍ وَجَابِرٍ وَعَائِشَةَ وَابْنِ عَبَّاسٍ وَأَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ ابْنِ عُمَرَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَالْعَمَلُ عَلَيْهِ عِنْدَ بَعْضِ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَغَيْرِهِمْ وَهُوَ قَوْلُ سُفْيَانَ وَالشَّافِعِيِّ وَأَحْمَدَ وَإِسْحَقَ قَالَ الشَّافِعِيُّ وَإِنْ زَادَ فِي التَّلْبِيَةِ شَيْئًا مِنْ تَعْظِيمِ اللَّهِ فَلَا بَأْسَ إِنْ شَاءَ اللَّهُ وَأَحَبُّ إِلَيَّ أَنْ يَقْتَصِرَ عَلَى تَلْبِيَةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الشَّافِعِيُّ وَإِنَّمَا قُلْنَا لَا بَأْسَ بِزِيَادَةِ تَعْظِيمِ اللَّهِ فِيهَا لِمَا جَاءَ عَنْ ابْنِ عُمَرَ وَهُوَ حَفِظَ التَّلْبِيَةَ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ زَادَ ابْنُ عُمَرَ فِي تَلْبِيَتِهِ مِنْ قِبَلِهِ لَبَّيْكَ وَالرَّغْبَاءُ إِلَيْكَ وَالْعَمَلُ
हमनी के बतवले बा [अहमद बिन मनी’] हमनी के [इस्माइल बिन इब्राहिम] से [अय्यूब] से [नाफी] से [इब्न उमर] से बतवले बाड़े कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के तलबिया ह: 'लबबैका अल्लाहुम्मा लबबैक लबबैका ला सियरीका लका लबबैक। इन्नाल हमदा वा अन्नी'माता लका वाल मूलका ला स्यारीका लका' -हम तोहार पुकार पूरा करतानी हे अल्लाह, तोहार पुकार पूरा करतानी। हम तोहार पुकार पूरा करत बानी, तोहरा खातिर कवनो साथी नइखे आ हम तोहार पुकार पूरा करत बानी। सचमुच, सब स्तुति आ आशीर्वाद तोहरा आ तोहरा राज्य के ह, तोहार कवनो साथी नइखे।' -अबू ईसा तिरमिधी में- कहले; 'हदीस इब्न मसूद, जाबीर, 'ऐस्याह, इब्न अब्बास आ अबू हुरैराह से रिवायत भइल बा'। अबू ईसा कहले कि; इब्न उमर के हदीस हसन के सच्चे हदीस ह अवुरी एकर अमल नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी लोग में से कुछ विद्वान करेले। साथ ही सुफियान, स्याफीई, अहमद आ इशाक के राय भी। शफीई कहले कि; 'अगर उ अल्लाह के महिमामंडन के इरादा से कुछ जोड़ देले त ठीक बा, इन शा अल्लाह।' हालांकि हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ताल्बिया के इस्तेमाल कइल पसंद करीलें. शफीई कहले कि; 'तल्बिया जोड़ल जायज होखे के कारण इ बा कि इब्न उमर के इतिहास में जे रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से तलबिया रट लेले रहले, फिर उ 'लबबैका वा अररागबा`उ इलैका वाल अमल -हम राउर पुकार पूरा करतानी अवुरी हमार दानशील इच्छा सिर्फ आपके खाती बा-' शब्द जोड़ले रहले।
हदीस :
Imam Ahmad : 2280, 2618, 3702, 4225, 4590, 4661, 4755, 4777, 4782, 4827, 4842, 4907, 5218, 5251, 5749, 5871, 22912, 23549, 24305, 24729, 24745, 24867, 24868
Imam Bukhari : 1448, 1449, 5460
Imam Muslim : 2029, 2030, 2031
Imam Abu Dawud : 1547
Imam Tirmidzi : 755, 756
Imam Nasa'i : 2697, 2698, 2699, 2700, 2701
Imam Ibnu Majah : 2909, 2910
Imam Malik : 643
Imam Darimi : 1740, 1778