हदीस
Abu ahli tauhid setelah diadzab di neraka, disiram air kemudian akan tumbuh
Imam Bukhari : 21حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ قَالَ حَدَّثَنِي مَالِكٌ عَنْ عَمْرِو بْنِ يَحْيَى الْمَازِنِيِّ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ يَدْخُلُ أَهْلُ الْجَنَّةِ الْجَنَّةَ وَأَهْلُ النَّارِ النَّارَ ثُمَّ يَقُولُ اللَّهُ تَعَالَى أَخْرِجُوا مِنْ النَّارِ مَنْ كَانَ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالُ حَبَّةٍ مِنْ خَرْدَلٍ مِنْ إِيمَانٍ فَيُخْرَجُونَ مِنْهَا قَدْ اسْوَدُّوا فَيُلْقَوْنَ فِي نَهَرِ الْحَيَا أَوْ الْحَيَاةِ شَكَّ مَالِكٌ فَيَنْبُتُونَ كَمَا تَنْبُتُ الْحِبَّةُ فِي جَانِبِ السَّيْلِ أَلَمْ تَرَ أَنَّهَا تَخْرُجُ صَفْرَاءَ مُلْتَوِيَةًقَالَ وُهَيْبٌ حَدَّثَنَا عَمْرٌو الْحَيَاةِ وَقَالَ خَرْدَلٍ مِنْ خَيْرٍ
हमनी के बतवले बाड़े [इस्माइल] कहले बाड़े, हमनी के [मलिक] से [अमरू बिन याह्या अल मज़ानी] से [अपना पिता] से [अबू सईद अल खुदरी] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतवले बाड़े, उ कहले बाड़े कि, 'स्वर्ग के अहलू स्वर्ग में घुस गईल बाड़े अवुरी नरक के अहलू नरक में घुस गईल बाड़े।' तब अल्लाह तआला कहले कि, 'जेकर दिल में सरसों के दाना के आकार के इमान होखे, ओकरा के नरक से निकाल लीं'। त ऊ लोग जरावल करिया हालत में नरक से बाहर निकलल आ ओकरा बाद जिनिगी भा जिनिगी के नदी में डाल दिहल गइल. -मलिक के संदेह बा। - फिर नदी के किनारे उगत बीज निहन उग गईले। का रउरा ना देखनी कि ऊ कइसे पीयर रंग के साथे निकलल'.कहले [वुहैब] हमनी के ['अमरू] से कहले रहले: 'जीवन'। आ कहलस- 'नीमन के तनी-मनी'।