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Perumpamaan orang yang diberi iman dan Al-Qur'an
Imam Darimi : 3228حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ حَدَّثَنَا فِطْرٌ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ الْحَارِثِ عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ مِنْ النَّاسِ مَنْ يُؤْتَى الْإِيمَانَ وَلَا يُؤْتَى الْقُرْآنَ وَمِنْهُمْ مَنْ يُؤْتَى الْقُرْآنَ وَلَا يُؤْتَى الْإِيمَانَ وَمِنْهُمْ مَنْ يُؤْتَى الْقُرْآنَ وَالْإِيمَانَ وَمِنْهُمْ مَنْ لَا يُؤْتَى الْقُرْآنَ وَلَا الْإِيمَانَ ثُمَّ ضَرَبَ لَهُمْ مَثَلًا قَالَ فَأَمَّا مَنْ أُوتِيَ الْإِيمَانَ وَلَمْ يُؤْتَ الْقُرْآنَ فَمَثَلُهُ مَثَلُ التَّمْرَةِ حُلْوَةُ الطَّعْمِ لَا رِيحَ لَهَا وَأَمَّا مَثَلُ الَّذِي أُوتِيَ الْقُرْآنَ وَلَمْ يُؤْتَ الْإِيمَانَ فَمَثَلُ الْآسَةِ طَيِّبَةُ الرِّيحِ مُرَّةُ الطَّعْمِ وَأَمَّا الَّذِي أُوتِيَ الْقُرْآنَ وَالْإِيمَانَ فَمَثَلُ الْأُتْرُجَّةِ طَيِّبَةُ الرِّيحِ حُلْوَةُ الطَّعْمِ وَأَمَّا الَّذِي لَمْ يُؤْتَ الْقُرْآنَ وَلَا الْإِيمَانَ فَمَثَلُهُ مَثَلُ الْحَنْظَلَةِ مُرَّةُ الطَّعْمِ لَا رِيحَ لَهَا
हमरा सब के कहलक अछि [अबू नुअइम] हमरा सब के [फिथर] के [अबू इशाक] स [अल हरिथ] स [अली] रडियाल्लाहु अनहु स कहलक अछि, ओ कहलनि; मनुष्य मे एहन लोक छथि जिनका मात्र ईमान देल जाइत छनि आ कुरान नहि देल जाइत छनि | ओहि मे एहन लोक सेहो छलाह जिनका मात्र कुरान देल गेल छल आ आस्था नहि देल गेल छल | ओहि मे एहन लोक सेहो छलाह जिनका कुरान आ आस्था देल गेल छलनि। ओहि मे एहन लोक सेहो छलाह जिनका कुरान वा आस्था नहि देल गेल छलनि । तखन ओ हुनका सभक लेल एकटा दृष्टान्त बनौलनि। रहल बात एहन लोकक जेकरा मात्र ईमान देल गेल छैक आ कुरान नहि देल गेल छैक, ओ खजूर जकाँ होइत छैक जकर स्वाद मीठ होइत छैक मुदा गंध नीक नहि होइत छैक; जेकरा खाली कुरान देल गेल छै आरू ओकरा ईमान नै देलऽ जाय छै, वू असह पौधा के तरह छै जेकरऽ गंध अच्छा होय छै लेकिन स्वाद कड़वा होय छै । जेकरा कुरान आरू ईमान देलऽ जाय छै, वू फल के तरह होय छै जेकरऽ गंध अच्छा होय छै आरू स्वाद मीठऽ होय छै । एम्हर जेकरा कुरान या आस्था नै देल गेल छै, ओ हंझाला पौधा जेकाँ छै जेकरऽ स्वाद कड़वा होय छै आरू ओकरा म॑ कोनो सुगंधित गंध नै होय छै ।