हदीस
Kesempurnaan iman dengan lebih mencintai Nabi daripada semuanya
Imam Bukhari : 13حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ فَوَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَا يُؤْمِنُ أَحَدُكُمْ حَتَّى أَكُونَ أَحَبَّ إِلَيْهِ مِنْ وَالِدِهِ وَوَلَدِهِ
हमनी के बतावल गइल बा [अबू अल यमन] कहले बाड़न, हमनी के बतावल गइल बा [स्यूअइब] कहले बाड़न, हमनी के [अबू अज़ ज़नाद] के [अल अ’राज] से [अबू हुरैरा] से बतावल गइल बा, कि अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कहले बाड़न कि: ‘त ओह आदमी के द्वारा जबले हमार आत्मा बा, तबले रउरा में से केहू विश्वास ना करी जबले हमरा से अधिका प्यार ना हो जाई ओकर माई-बाबूजी आ ओकर लइका-लइकी'।