प्रतिनिधि हदीस
इमाम इब्नु माजा : 89
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُصَفَّى الْحِمْصِيُّ حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ بْنُ الْوَلِيدِ عَنْ الْأَوْزَاعِيِّ عَنْ ابْنِ جُرَيْجٍ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ مَجُوسَ هَذِهِ الْأُمَّةِ الْمُكَذِّبُونَ بِأَقْدَارِ اللَّهِ إِنْ مَرِضُوا فَلَا تَعُودُوهُمْ وَإِنْ مَاتُوا فَلَا تَشْهَدُوهُمْ وَإِنْ لَقِيتُمُوهُمْ فَلَا تُسَلِّمُوا عَلَيْهِمْ
हमसे कहा है [मुहम्मद बिन अल मुशफ्फा अल हिमशी] ने, हमसे कहा है [बकियाह बिन अल वालिद] ने [अल औज़ाई] से [इब्न जुरैज] से [अबू जुबैर] से [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] ने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: “बेशक, इस उम्मत के समझदार लोग वे लोग हैं जो अल्लाह के नसीब को झुठलाते हैं। अगर वे बीमार हों, तो उनसे मिलने मत जाओ, अगर वे मर जाएं, तो उनका दुख मत मनाओ और अगर तुम उनसे मिलो, तो नमस्ते मत कहो।”