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Wahai Abu Hurairah, kamu mengebiri, atau tidak adalah takdir
Imam Bukhari : 4686حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ عَنْ إِسْمَاعِيلَ عَنْ قَيْسٍ قَالَ قَالَ عَبْدُ اللَّهِكُنَّا نَغْزُو مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَلَيْسَ لَنَا شَيْءٌ فَقُلْنَا أَلَا نَسْتَخْصِي فَنَهَانَا عَنْ ذَلِكَ ثُمَّ رَخَّصَ لَنَا أَنْ نَنْكِحَ الْمَرْأَةَ بِالثَّوْبِ ثُمَّ قَرَأَ عَلَيْنَا{ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تُحَرِّمُوا طَيِّبَاتِ مَا أَحَلَّ اللَّهُ لَكُمْ وَلَا تَعْتَدُوا إِنَّ اللَّهَ لَا يُحِبُّ الْمُعْتَدِينَ }وَقَالَ أَصْبَغُ أَخْبَرَنِي ابْنُ وَهْبٍ عَنْ يُونُسَ بْنِ يَزِيدَ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي رَجُلٌ شَابٌّ وَأَنَا أَخَافُ عَلَى نَفْسِي الْعَنَتَ وَلَا أَجِدُ مَا أَتَزَوَّجُ بِهِ النِّسَاءَ فَسَكَتَ عَنِّي ثُمَّ قُلْتُ مِثْلَ ذَلِكَ فَسَكَتَ عَنِّي ثُمَّ قُلْتُ مِثْلَ ذَلِكَ فَسَكَتَ عَنِّي ثُمَّ قُلْتُ مِثْلَ ذَلِكَ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا أَبَا هُرَيْرَةَ جَفَّ الْقَلَمُ بِمَا أَنْتَ لَاقٍ فَاخْتَصِ عَلَى ذَلِكَ أَوْ ذَرْ
हमरा सभकेँ [कुतैबा बिन सईद] हमरा सभकेँ [जरीर] [इस्माइल]सँ [कायस]सँ कहलक अछि ओ कहलनि; [अब्दुल्लाह] कहलनि; हम एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संग मिल क लड़ने रही, आ ओहि समय हमरा सब लग किछु नहि छल। तखन हम सभ कहलियनि, 'की हमरा सभ केँ क्षत्रिय करबाक चाही?' आ प्रत्यक्षतः ओ हमरा सभकेँ मना कए देलनि , तखन हमरा सभकेँ रुखशाह देलनि , अर्थात कपड़ाक दहेजसँ सेहो कोनो महिलासँ विवाह करब । तखन ई आयत पढ़ू: 'हे विश्वासी लोकनि, अल्लाह जे कोनो नीक चीज केँ अल्लाह अहाँ सभक लेल हलाल केने छथि, ओकरा मना नहि करू, आ सीमा सँ बाहर नहि जाउ, वाकई अल्लाह केँ एहन लोक पसिन नहि छनि जे सीमा सँ बेसी भ' जाइत छथि'। -प्रश्न। अलमैदा 87-। [एशबाग] कहलनि; हमरा [इब्न वहब] के [यूनुस बिन यजीद] स [इब्न शिहाब] स [अबू सलामाह] स [अबू हुरैरा] स अल्लाह हुनका स प्रसन्न होथि, ओ कहलनि; हम कहलियनि, 'हे अल्लाह केर रसूलुल्लाह, हम एकटा युवक छी, आ घृणित काज मे पड़ि गेलहुँ त' हम अपना लेल चिंतित छी, मुदा हमरा लग कोनो महिला सँ विवाह करबाक लेल किछु नहि अछि'। ओ चुप भ’ गेलाह। हम फेर से कहलियनि, ओ एखनो चुप छलाह। हम फेर दोहरलहुँ, तखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'हे अबू हुरैरा, कलाम सुखि गेल अछि - भाग्य निर्धारित भ' गेल अछि - जे किछु सामना करय पड़त ताहि लेल, अहाँ ओकरा क्षत्रिय क' सकैत छी, वा कृपया छोड़ि दियौक'।