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Shalat dan doa istikharah untuk memohon takdir yang terbaik
Imam Bukhari : 1096حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي الْمَوَالِي عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُعَلِّمُنَا الِاسْتِخَارَةَ فِي الْأُمُورِ كُلِّهَا كَمَا يُعَلِّمُنَا السُّورَةَ مِنْ الْقُرْآنِ يَقُولُ إِذَا هَمَّ أَحَدُكُمْ بِالْأَمْرِ فَلْيَرْكَعْ رَكْعَتَيْنِ مِنْ غَيْرِ الْفَرِيضَةِ ثُمَّ لِيَقُلْ اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْتَخِيرُكَ بِعِلْمِكَ وَأَسْتَقْدِرُكَ بِقُدْرَتِكَ وَأَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ الْعَظِيمِ فَإِنَّكَ تَقْدِرُ وَلَا أَقْدِرُ وَتَعْلَمُ وَلَا أَعْلَمُ وَأَنْتَ عَلَّامُ الْغُيُوبِ اللَّهُمَّ إِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الْأَمْرَ خَيْرٌ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي أَوْ قَالَ عَاجِلِ أَمْرِي وَآجِلِهِ فَاقْدُرْهُ لِي وَيَسِّرْهُ لِي ثُمَّ بَارِكْ لِي فِيهِ وَإِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الْأَمْرَ شَرٌّ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي أَوْ قَالَ فِي عَاجِلِ أَمْرِي وَآجِلِهِ فَاصْرِفْهُ عَنِّي وَاصْرِفْنِي عَنْهُ وَاقْدُرْ لِي الْخَيْرَ حَيْثُ كَانَ ثُمَّ أَرْضِنِي قَالَ وَيُسَمِّي حَاجَتَهُ
हमरा सब के कहलक अछि [कुतैबा] कहलक अछि, हमरा सब के बता देलक अछि [अब्दुररहमान बिन अबू अल मवाली] स [मुहम्मद बिन अल मुनकदीर] स [जाबिर बिन अब्दुल्लाह रदलियाहु अनहुआ] कहलक: 'रसुलुल्लाह सल्लाह अलैहि वस्लाम हमरा सब के हर मामला में इस्तीखारा के नमाज पढ़ौलनि जेना ओ हमरा सब के कुरान सिखबैत छलाह, जे ओ हमरा सब के कुरान सिखबैत छलाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जदि तोरा सब में से किसी को कोई समस्या के सामना करना पड़े तो प्रणाम करें - दो रकाअत नमाज पढ़ें जो फर्ज नमाज नहीं है तो प्रार्थना करें: 'अल्लाहुम्मा इन्निय अस्ताखिरुका बी इल्मिका वा अस्तकदिरुका बिकुद्रतिका वा अस-अलुका मिन फढ़लिकल 'अझिम, फैनका तकदीरु वा ला अकदीरु वा तलामु वा ला 'अब्दुल्लाह'लामु व अल्लामुल घुयूब। अल्लाहुम्मा इन कुंता त'लामु अन्ना हडजल अमरू खैरुल लिय फिय दिइनिय वा आई मा'अस्य्यय वा 'आफियती अमरीय' या; 'आजिली अमरीय वा अजीलिहि फकदुरहु लिय वा यसिरहु लिय त्सुम्मा बेरिक लिय फिहि। वा इन कुंता त'लामु अन्ना हडजल अमरू स्यारुल लिय फिय दिइनिय वा मा'अस्य्यय वा 'आफियति अमरीय' आव काओला; फिय 'अजीली अमरीय वा अजीलिहि फशरिफहु 'अन्निय वशरीफनिय 'अनहु वक्दुरलियल खैरा हैत्सु काना सुम्मार धिनिय'। ओ कहलनि: आ आवश्यकता बताउ' - हे अल्लाह, हम अहाँक ज्ञान सँ विकल्प माँगैत छी आ अहाँक शक्ति सँ क्षमता माँगैत छी आ अहाँक पैघ कृपा सँ माँगैत छी, कारण अहाँ सर्वशक्तिमान छी जखन कि हम शक्तिशाली नहि छी, अहाँ सर्वज्ञ छी जखन कि हम नहि जनैत छी कारण अहाँ अदृश्य केर सर्वज्ञ छी। हे अल्लाह, जँ अहाँ जनैत छी जे ई बात हमरा लेल, हमर धर्म लेल, हमर जीवन लेल आ एहि बातक अंत लेल नीक अछि वा ओ कहलनि; निकट भविष्य में या भविष्य में एकरा हमर भाग्य बनाउ आ हमरा लेल आसान बनाउ तखन हुनका आशीर्वाद दियौन | मुदा एकर विपरीत हे अल्लाह, जँ अहाँ जनैत छी जे ई बात हमरा लेल, हमर धर्मक लेल, हमर जीवन लेल आ एहि बातक अंत लेल खराब अछि वा ओ कहलनि; निकट भविष्य मे वा भविष्य मे हमर काज हमरा सँ दूर राखू आ हमरा ओकरा सँ दूर राखू आ हमरा लेल मात्र नीक काज निर्धारित करू जतय ओ हो, तखन हमर हृदय केँ अपन फरमान सँ संरेखित करू'। ओ कहलनि : 'ओ ओहि मामलाक जिक्र केलनि जाहि लेल हुनका चुनबाक लेल कहल जा रहल छलनि'।