प्रतिनिधि हदीस
इमाम अबू दाऊद : 4075
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ حَدَّثَنَا أَبِي حَدَّثَنَا كَهْمَسٌ عَنْ ابْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ قَالَ كَانَ أَوَّلَ مَنْ تَكَلَّمَ فِي الْقَدَرِ بِالْبَصْرَةِ مَعْبَدٌ الْجُهَنِيُّ فَانْطَلَقْتُ أَنَا وَحُمَيْدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْحِمْيَرِيُّ حَاجَّيْنِ أَوْ مُعْتَمِرَيْنِ فَقُلْنَا لَوْ لَقِينَا أَحَدًا مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَسَأَلْنَاهُ عَمَّا يَقُولُ هَؤُلَاءِ فِي الْقَدَرِ فَوَفَّقَ اللَّهُ لَنَا عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ دَاخِلًا فِي الْمَسْجِدِ فَاكْتَنَفْتُهُ أَنَا وَصَاحِبِي فَظَنَنْتُ أَنَّ صَاحِبِي سَيَكِلُ الْكَلَامَ إِلَيَّ فَقُلْتُ أَبَا عَبْدِ الرَّحْمَنِ إِنَّهُ قَدْ ظَهَرَ قِبَلَنَا نَاسٌ يَقْرَءُونَ الْقُرْآنَ وَيَتَفَقَّرُونَ الْعِلْمَ يَزْعُمُونَ أَنْ لَا قَدَرَ وَالْأَمْرَ أُنُفٌ فَقَالَ إِذَا لَقِيتَ أُولَئِكَ فَأَخْبِرْهُمْ أَنِّي بَرِيءٌ مِنْهُمْ وَهُمْ بُرَآءُ مِنِّي وَالَّذِي يَحْلِفُ بِهِ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ لَوْ أَنَّ لِأَحَدِهِمْ مِثْلَ أُحُدٍ ذَهَبًا فَأَنْفَقَهُ مَا قَبِلَهُ اللَّهُ مِنْهُ حَتَّى يُؤْمِنَ بِالْقَدَرِ ثُمَّ قَالَ حَدَّثَنِي عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ قَالَبَيْنَمَا نَحْنُ عِنْدَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذْ طَلَعَ عَلَيْنَا رَجُلٌ شَدِيدُ بَيَاضِ الثِّيَابِ شَدِيدُ سَوَادِ الشَّعْرِ لَا يُرَى عَلَيْهِ أَثَرُ السَّفَرِ وَلَا نَعْرِفُهُ حَتَّى جَلَسَ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَسْنَدَ رُكْبَتَيْهِ إِلَى رُكْبَتَيْهِ وَوَضَعَ كَفَّيْهِ عَلَى فَخِذَيْهِ وَقَالَ يَا مُحَمَّدُ أَخْبِرْنِي عَنْ الْإِسْلَامِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْإِسْلَامُ أَنْ تَشْهَدَ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ وَتُقِيمَ الصَّلَاةَ وَتُؤْتِيَ الزَّكَاةَ وَتَصُومَ رَمَضَانَ وَتَحُجَّ الْبَيْتَ إِنْ اسْتَطَعْتَ إِلَيْهِ سَبِيلًا قَالَ صَدَقْتَ قَالَ فَعَجِبْنَا لَهُ يَسْأَلُهُ وَيُصَدِّقُهُ قَالَ فَأَخْبِرْنِي عَنْ الْإِيمَانِ قَالَ أَنْ تُؤْمِنَ بِاللَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَكُتُبِهِ وَرُسُلِهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَتُؤْمِنَ بِالْقَدَرِ خَيْرِهِ وَشَرِّهِ قَالَ صَدَقْتَ قَالَ فَأَخْبِرْنِي عَنْ الْإِحْسَانِ قَالَ أَنْ تَعْبُدَ اللَّهَ كَأَنَّكَ تَرَاهُ فَإِنْ لَمْ تَكُنْ تَرَاهُ فَإِنَّهُ يَرَاكَ قَالَ فَأَخْبِرْنِي عَنْ السَّاعَةِ قَالَ مَا الْمَسْئُولُ عَنْهَا بِأَعْلَمَ مِنْ السَّائِلِ قَالَ فَأَخْبِرْنِي عَنْ أَمَارَاتِهَا قَالَ أَنْ تَلِدَ الْأَمَةُ رَبَّتَهَا وَأَنْ تَرَى الْحُفَاةَ الْعُرَاةَ الْعَالَةَ رِعَاءَ الشَّاءِ يَتَطَاوَلُونَ فِي الْبُنْيَانِ قَالَ ثُمَّ انْطَلَقَ فَلَبِثْتُ ثَلَاثًا ثُمَّ قَالَ يَا عُمَرُ هَلْ تَدْرِي مَنْ السَّائِلُ قُلْتُ اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ فَإِنَّهُ جِبْرِيلُ أَتَاكُمْ يُعَلِّمُكُمْ دِينَكُمْحَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ عُثْمَانَ بْنِ غِيَاثٍ قَالَ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ بُرَيْدَةَ عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ وَحُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ قَالَا لَقِيَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ فَذَكَرْنَا لَهُ الْقَدَرَ وَمَا يَقُولُونَ فِيهِ فَذَكَرَ نَحْوَهُ زَادَ قَالَ وَسَأَلَهُ رَجُلٌ مِنْ مُزَيْنَةَ أَوْ جُهَيْنَةَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ فِيمَا نَعْمَلُ أَفِي شَيْءٍ قَدْ خَلَا أَوْ مَضَى أَوْ فِي شَيْءٍ يُسْتَأْنَفُ الْآنَ قَالَ فِي شَيْءٍ قَدْ خَلَا وَمَضَى فَقَالَ الرَّجُلُ أَوْ بَعْضُ الْقَوْمِ فَفِيمَ الْعَمَلُ قَالَ إِنَّ أَهْلَ الْجَنَّةِ يُيَسَّرُونَ لِعَمَلِ أَهْلِ الْجَنَّةِ وَإِنَّ أَهْلَ النَّارِ يُيَسَّرُونَ لِعَمَلِ أَهْلِ النَّارِ حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ خَالِدٍ حَدَّثَنَا الْفِرْيَابِيُّ عَنْ سُفْيَانَ قَالَ حَدَّثَنَا عَلْقَمَةُ بْنُ مَرْثَدٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ ابْنِ يَعْمَرَ بِهَذَا الْحَدِيثِ يَزِيدُ وَيَنْقُصُ قَالَ فَمَا الْإِسْلَامُ قَالَ إِقَامُ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءُ الزَّكَاةِ وَحَجُّ الْبَيْتِ وَصَوْمُ شَهْرِ رَمَضَانَ وَالِاغْتِسَالُ مِنْ الْجَنَابَةِ قَالَ أَبُو دَاوُد عَلْقَمَةُ مُرْجِئٌ
हमसे कहा है [उबैदुल्लाह बिन मुअज़्ज़] ने कहा, हमसे कहा है [मेरे पिता] ने कहा, हमसे कहा है [कहमास] [इब्न बुरैदा] से [याह्या बिन य'मार] ने कहा, "जिस व्यक्ति ने सबसे पहले बसरा शहर में किस्मत के बारे में बात की थी, वह मबाद अल जुहानी था। मैं और हुमैद बिन 'अब्दुर्रहमान अल हिम्यारी हज या उमराह पर गए थे। फिर हमने कहा, "अगर बाद में हम अपने किसी दोस्त से मिलते हैं। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, तो हम उससे पूछेंगे कि लोग किस्मत के बारे में क्या कहते हैं। फिर अल्लाह ने हमें [अब्दुल्लाह बिन उमर] से मिलने के लिए नियत किया जब वह मस्जिद में प्रवेश करने वाले थे, तो मैं और मेरा दोस्त उनके पास गए। मुझे लगा कि मेरा दोस्त मुझे यह बातचीत बताएगा, इसलिए मैंने कहा, "ऐ अबू अब्दुर्रहमान, हमारे बीच ऐसे लोग आए हैं जो कुरान पढ़ते हैं और ज्ञान पाने में मेहनती हैं, लेकिन उनका मानना है कि कोई किस्मत नहीं होती, और चीजें बस किस्मत के बिना किसी दखल के होती हैं!" इब्न उमर ने फिर कहा, "अगर तुम उनसे मिलो तो कहना कि मैं उन्हें छोड़ रहा हूँ और वे भी मुझे छोड़ रहे हैं। और जिसकी कसम अब्दुल्लाह बिन उमर ने खाई है, अगर उनके पास उहुद पहाड़ जितना बड़ा सोना है, और फिर वे उसे खर्च करते हैं, तो अल्लाह उसे तब तक कबूल नहीं करेगा जब तक वे किस्मत पर यकीन न करें।" फिर उन्होंने कहा, "[उमर इब्नुल खत्तहब] ने मुझे बताया, उन्होंने कहा, "जब हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ थे, तो अचानक एक आदमी आया जिसने बहुत सफेद कपड़े पहने हुए थे और उसके बाल बहुत काले थे। इस बात के कोई निशान नहीं थे कि वह लंबी यात्रा पर था, लेकिन हममें से कोई भी उसे नहीं जानता था। फिर वह पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास गया, उसने अपने घुटने पैगंबर के घुटनों पर टिका दिए और अपने हाथों की हथेलियां उनकी दोनों जांघों पर रख दीं। उसके बाद उसने कहा, "ऐ मुहम्मद, मुझे इस्लाम के बारे में बताओ?" रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: "इस्लाम यह है कि तुम इस बात की गवाही दो कि अल्लाह के अलावा कोई इबादत के लायक नहीं है और मुहम्मद उसके रसूल हैं। तुम नमाज़ पढ़ते हो, ज़कात देते हो, रमज़ान में रोज़े रखते हो और अगर हो सके तो मंदिर की हज यात्रा करते हो।" उस आदमी ने कहा, "तुम सही हो।" उमर ने कहा, "हम उस पर हैरान थे, उसने पूछा और उसने खुद इसकी पुष्टि की।" उस आदमी ने फिर पूछा, "मुझे ईमान के बारे में बताओ?" उसने जवाब दिया: "ईमान यह है कि तुम अल्लाह, उसके फ़रिश्तों, उसकी किताबों, उसके रसूलों, आखिरी दिन पर ईमान लाते हो और किस्मत पर ईमान लाते हो; बुरी या अच्छी।" उस आदमी ने कहा, "तुम सही हो।" उस आदमी ने आगे कहा, "मुझे बताओ एहसान क्या है?" उसने उत्तर दिया: "तुम अल्लाह की इबादत ऐसे करते हो जैसे तुम उसे देखते हो, अगर तुम उसे नहीं देख सकते, तो वास्तव में वह तुम्हें देख सकता है।" उस आदमी ने फिर पूछा, "मुझे न्याय के दिन के बारे में बताओ?" उसने उत्तर दिया: "जिस व्यक्ति से पूछा जा रहा है, वह पूछने वाले से बेहतर नहीं जानता।" उस आदमी ने पूछा, "तो मुझे निशानियाँ बताओ?" उसने उत्तर दिया: "यदि एक गुलाम ने अपने मालिक को जन्म दिया है, तो आप नंगे पांव (गरीब) लोगों और भेड़ चराने वालों को ऊंची इमारतें बनाने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हुए देखते हैं।" उमर ने कहा, "फिर वह आदमी चला गया, और मैं तीन दिनों तक चुप रहा। फिर उसने कहा: "हे उमर, क्या तुम जानते हो कि वह आदमी कौन था जिसने वह प्रश्न पूछा था?" मैंने उत्तर दिया, "अल्लाह और उसके रसूल बेहतर जानते हैं। उन्होंने कहा: "वह गेब्रियल है, वह तुम्हारे पास तुम्हारे धार्मिक मामलों के बारे में सिखाने आया मुझे [अब्दुल्ला बिन बुरैदा] ने [याह्या बिन यामार] और [हुमैद बिन अब्दुर्रहमान] दोनों से कहा, "हम [अब्दुल्ला बिन उमर] से मिले, फिर हमने उन्हें किस्मत के बारे में बताया और लोग इसके बारे में क्या कहते हैं... फिर उन्होंने हदीस का ज़िक्र किया। लेकिन उन्होंने आगे कहा, "फिर मुज़ैना या जुहैना से एक आदमी आया जिसने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा, "ऐ रसूलल्लाह, हमें अच्छे काम कैसे करने चाहिए? क्या वे काम पिछली किस्मत पर आधारित हैं या किसी नई चीज़ पर आधारित हैं?" उन्होंने जवाब दिया: "किसी ऐसी चीज़ पर जो तय हो चुकी है।" उस आदमी, या कुछ लोगों ने फिर पूछा, "तो फिर हम दान क्यों करते हैं?" उन्होंने जवाब दिया: "बेशक, जन्नत के लोगों के कामों से जन्नत के लोगों के लिए अच्छे काम करना आसान हो जाएगा, और जहन्नम के लोगों के कामों से जहन्नम के लोगों के लिए अच्छे काम करना आसान हो जाएगा।" हमें बताया है [महमूद बिन खालिद] ने कहा, हमें बताया है [अल फिरयाबी] ने [सुफ़यान] से उसने कहा; हमें बताया है [अलक़माह बिन मर्त्सद] ने [सुलेमान बिन बुरैदा] से [इब्न यामार] ने उसी हदीस के साथ, "बढ़ो और घटो।" उसने पूछा, "तो इस्लाम क्या है?" उसने जवाब दिया: "नमाज़ पढ़ो, ज़कात दो, हज करो, रमज़ान के महीने में रोज़े रखो, और जुनूब करो।" अबू दाऊद ने कहा, "अलक़माह एक मुर्जिया है।"