प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 1300
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ حَدَّثَنِي سُلَيْمَانُ عَنْ هِشَامٍ ح و حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا أَبُو مَرْوَانَ يَحْيَى بْنُ أَبِي زَكَرِيَّاءَ عَنْ هِشَامٍ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْإِنْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيَتَعَذَّرُ فِي مَرَضِهِ أَيْنَ أَنَا الْيَوْمَ أَيْنَ أَنَا غَدًا اسْتِبْطَاءً لِيَوْمِ عَائِشَةَ فَلَمَّا كَانَ يَوْمِي قَبَضَهُ اللَّهُ بَيْنَ سَحْرِي وَنَحْرِي وَدُفِنَ فِي بَيْتِي
हमसे कहा गया है कि [इस्माईल] ने मुझे [सुलेमान] ने [हिस्यम] से बताया है और यह एक और तरीके से भी वर्णित है, मुझसे कहा गया है कि [मुहम्मद बिन हर्ब] ने हमें बताया है [अबू मरवान यह्या बिन अबू ज़कारिया] ने [हिशाम] से [उरवाह] से [आइस्या रदलिल्लाहु अन्हा] ने कहा,: जब रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बीमार थे और उन्होंने अपनी पत्नियों के साथ रहने की अपनी बारी के लिए माफ़ी मांगी (उन्होंने पूछा): "मैं आज कहां हूं और कल कहां रहूंगा?", उस समय जाहिर तौर पर वह 'आइस्या की बारी में अधिक समय तक रहना चाहते थे, अल्लाह उस पर प्रसन्न हो। जब मेरे घर में उनकी बारी आई, तो अल्लाह ने उनकी जान ले ली जो मेरे सीने और मेरी गोद में थी, फिर उन्हें मेरे घर में दफना दिया गया।