Hadith Representative
Doa Nabi Muhammad SAW yang belum dikabulkan
Imam Tirmidzi : 2101حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا وَهْبُ بْنُ جَرِيرٍ حَدَّثَنَا أَبِي قَال سَمِعْتُ النُّعْمَانَ بْنَ رَاشِدٍ يُحَدِّثُ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْحَارِثِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ خَبَّابِ بْنِ الْأَرَتِّ عَنْ أَبِيهِ قَالَصَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صَلَاةً فَأَطَالَهَا قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّيْتَ صَلَاةً لَمْ تَكُنْ تُصَلِّيهَا قَالَ أَجَلْ إِنَّهَا صَلَاةُ رَغْبَةٍ وَرَهْبَةٍ إِنِّي سَأَلْتُ اللَّهَ فِيهَا ثَلَاثًا فَأَعْطَانِي اثْنَتَيْنِ وَمَنَعَنِي وَاحِدَةً سَأَلْتُهُ أَنْ لَا يُهْلِكَ أُمَّتِي بِسَنَةٍ فَأَعْطَانِيهَا وَسَأَلْتُهُ أَنْ لَا يُسَلِّطَ عَلَيْهِمْ عَدُوًّا مِنْ غَيْرِهِمْ فَأَعْطَانِيهَا وَسَأَلْتُهُ أَنْ لَا يُذِيقَ بَعْضَهُمْ بَأْسَ بَعْضٍ فَمَنَعَنِيهَاقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ غَرِيبٌ وَفِي الْبَاب عَنْ سَعْدٍ وَابْنِ عُمَرَ
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन बसियार] हमसे कहिन है [वाहब बिन जरीर] हमसे कहिन है [मेरे पिता] ने कहा: हमने [नूमान बिन रसीद] [अज जुहरी] से [अब्दुल्ला बिन अल हरिथ] से [अब्दुल्ला बिन खब्बाब बिन अल आर्ट्स] से [उनके पिता] से कहा है: रल्लाहुलाह अलैह वल्लाहुलाहुलाहुलाहुद लंबा समय तक, साथियन ने पूछा: हे रसूलुल्लाह, का तुम रोज के तरह नमाज नाहीं पढ़त हौ? उ जवाब दिहिन: 'हाँ, ई प्यार अऊर भय के बीच के नमाज है, उ नमाज मा हम अल्लाह से तीन चीजन के मांग किहेन, फिर अल्लाह हमका दुइ चीजन दिहिन अऊर हमका एक चीज नाहीं दिहिन; हम उनसे कहिन कि भूख से हमार उम्मत का नष्ट न करै अऊर अल्लाह ने ई मंजूरी दिहिस, हमने ई कहिन कि हमार उम्मत ओनके अलावा दुश्मनन के हावी न हो अऊर अल्लाह ने ई मंजूर किहिन, फिर हमने ई कहिन कि ओनके बीच कौनो आंतरिक युद्ध न हो लेकिन अल्लाह ने ई मंजूर नाहीं किहिन।' अबू ईसा ने कहा: ई हदीस हसन शाहिह गरीब है, अऊर ई अध्याय मा साद अऊर इब्न उमर से हदीस हैं।