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Rasulullah tidak diijinkan memohonkan ampun untuk ibunya, tetapi menziarahi kuburnya boleh
Imam Ibnu Majah : 1561حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ كَيْسَانَ عَنْ أَبِي حَازِمٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَزَارَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَبْرَ أُمِّهِ فَبَكَى وَأَبْكَى مَنْ حَوْلَهُ فَقَالَ اسْتَأْذَنْتُ رَبِّي فِي أَنْ أَسْتَغْفِرَ لَهَا فَلَمْ يَأْذَنْ لِي وَاسْتَأْذَنْتُ رَبِّي فِي أَنْ أَزُورَ قَبْرَهَا فَأَذِنَ لِي فَزُورُوا الْقُبُورَ فَإِنَّهَا تُذَكِّرُكُمْ الْمَوْتَ
हमरा सब के कहल गेल अछि [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] कहलनि, हमरा सब के कहल गेल अछि [मुहम्मद बिन उबैद] कहलनि, हमरा सब के [यजीद बिन कैसन] के [अबू हाजिम] स [अबू हुरैरा] स कहल गेल अछि ओ कहलनि, 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपन माय के कब्र पर नहि गेलाह, ओ ता धरि कानय लगलाह जा धरि हुनकर आसपास के लोक सेहो कानय नहि गेलाह। तखन ओ कहलनि : 'हम अपन मायक लेल क्षमा मांगबाक लेल अपन प्रभु सँ अनुमति मंगलहुँ मुदा ओ हमरा अनुमति नहि देलनि । तखन हम हुनकर कब्र घुमबाक अनुमति मंगलहुँ आ ओ हमरा अनुमति देलनि । त श्मशान घाट पर जाउ किएक त ओ अहां के मौत के याद दिला सकैत अछि. ' .