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Setelah Aminah ibu Nabi wafat, dipelihara Ummu Aiman hingga dewasa
Imam Muslim : 3318و حَدَّثَنِي أَبُو الطَّاهِرِ وَحَرْمَلَةُ قَالَا أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ أَخْبَرَنِي يُونُسُ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَ لَمَّا قَدِمَ الْمُهَاجِرُونَ مِنْ مَكَّةَ الْمَدِينَةَ قَدِمُوا وَلَيْسَ بِأَيْدِيهِمْ شَيْءٌ وَكَانَ الْأَنْصَارُ أَهْلَ الْأَرْضِ وَالْعَقَارِ فَقَاسَمَهُمْ الْأَنْصَارُ عَلَى أَنْ أَعْطَوْهُمْ أَنْصَافَ ثِمَارِ أَمْوَالِهِمْ كُلَّ عَامٍ وَيَكْفُونَهُمْ الْعَمَلَ وَالْمَئُونَةَ وَكَانَتْ أُمُّ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ وَهِيَ تُدْعَى أُمَّ سُلَيْمٍ وَكَانَتْ أُمُّ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ كَانَ أَخًا لِأَنَسٍ لِأُمِّهِ وَكَانَتْ أَعْطَتْ أُمُّ أَنَسٍ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عِذَاقًا لَهَا فَأَعْطَاهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُمَّ أَيْمَنَ مَوْلَاتَهُ أُمَّ أُسَامَةَ بْنِ زَيْدٍ قَالَ ابْنُ شِهَابٍ فَأَخْبَرَنِي أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمَّا فَرَغَ مِنْ قِتَالِ أَهْلِ خَيْبَرَ وَانْصَرَفَ إِلَى الْمَدِينَةِ رَدَّ الْمُهَاجِرُونَ إِلَى الْأَنْصَارِ مَنَائِحَهُمْ الَّتِي كَانُوا مَنَحُوهُمْ مِنْ ثِمَارِهِمْ قَالَ فَرَدَّ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى أُمِّي عِذَاقَهَا وَأَعْطَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُمَّ أَيْمَنَ مَكَانَهُنَّ مِنْ حَائِطِهِ قَالَ ابْنُ شِهَابٍ وَكَانَ مِنْ شَأْنِ أُمِّ أَيْمَنَ أُمِّ أُسَامَةَ بْنِ زَيْدٍ أَنَّهَا كَانَتْ وَصِيفَةً لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ وَكَانَتْ مِنْ الْحَبَشَةِ فَلَمَّا وَلَدَتْ آمِنَةُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعْدَ مَا تُوُفِّيَ أَبُوهُ فَكَانَتْ أُمُّ أَيْمَنَ تَحْضُنُهُ حَتَّى كَبِرَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَعْتَقَهَا ثُمَّ أَنْكَحَهَا زَيْدَ بْنَ حَارِثَةَ ثُمَّ تُوُفِّيَتْ بَعْدَ مَا تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِخَمْسَةِ أَشْهُرٍ
आ हमरा [अबू अत थाहिर] आ [हरमाला] दुनू केँ कहि देने छथि; हमरा सभकेँ रिपोर्ट केने छथि [इब्नु वहब] हमरा [यूनुस] केँ [इब्नु शिहाब] सँ [अनास बिन मलिक] सँ रिपोर्ट केने छथि ओ कहलनि जे, 'जखन मुहाजिरीन मक्का सँ मदीना पहुँचलाह तखन ओ सभ किछु नहि ल' क' आयल छलाह, जखन कि अंसार सभ लग पैघ-पैघ जमीन आ ताड़क बगीचा छलनि।' तेँ अंसारक लोक सभ ओहि मे सँ किछु मुहाजिरीनक मित्र लोकनि केँ एहि शर्त पर बाँटि देलक जे ओ सभ अपन आधा फसल हर साल दऽ दियौक। तेँ मुहाजिरीन अंसार लोक सभकेँ काज आ भोजनक पाइ देलक' । श्रीमती अनस बिन मलिक या जेकरा आमतौर पर उम्म सुलैम कहलऽ जाय छै, आरू श्रीमती अब्दुल्लाह बिन अबू थल्हाह - अनस केरऽ सौतेला भाई, श्रीमती अनस न॑ अपनऽ खजूर केरऽ बगीचा नबी सल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम क॑ देलकै, तखनिये वू ओकरा श्रीमती उसामा बिन जैद केरऽ गुलाम उम्म ऐमान क॑ देलकै । इब्न शिहाब कहलनि, 'तखन अनस बिन मलिक हमरा कहलनि जे जखन रसुलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम खैबर युद्ध सँ वापस आबि गेलाह तखन ओ मदीना वापस आबि गेलाह, तखन मुहाजिरीन खजूरक गाछी वापस क' देलनि जे अंसार हुनका सभ केँ देने छलनि।' इब्न शिहाब कहलनि जे, रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सेहो अपन खजूर के बगीचा हमर माँ के वापस क देलखिन, आ ओ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सेहो अपन खजूर के बगीचा के किछु हिस्सा उम्म ऐमान के द देलखिन। इब्नू सिहाब कहलकै, 'उम्म ऐमान के साथ समस्या ई छेलै कि उसामा बिन जैद के माय एक समय में अब्दुल्ला बिन अब्दुल मुथथल्लिब के नौकर छेली जे हबास्या से आबी गेलऽ छेली । जखन अमीनाह - नबी के माय - रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जन्म देलखिन त हुनकर पिता के मृत्यु के बाद उम्म ऐमान छलाह जे हुनकर वयस्कता तक देखभाल केने छलाह, फेर हुनका मुक्त क देल गेल आ जैद बिन हरित्साह के विवाह भ गेलनि। उम्म ऐमन के निधन पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के निधन के पांच साल बाद भ गेलैन।