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Nabi Muhammad bermimpi pada hari kiamat Nabi Ibrahim adalah seorang yang tua yang berada di bawah pohon dengan anak-anak di sekitarnya
Imam Bukhari : 1297بَاب حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ حَدَّثَنَا جَرِيرُ بْنُ حَازِمٍ حَدَّثَنَا أَبُو رَجَاءٍ عَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدَبٍ قَالَكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا صَلَّى صَلَاةً أَقْبَلَ عَلَيْنَا بِوَجْهِهِ فَقَالَ مَنْ رَأَى مِنْكُمْ اللَّيْلَةَ رُؤْيَا قَالَ فَإِنْ رَأَى أَحَدٌ قَصَّهَا فَيَقُولُ مَا شَاءَ اللَّهُ فَسَأَلَنَا يَوْمًا فَقَالَ هَلْ رَأَى أَحَدٌ مِنْكُمْ رُؤْيَا قُلْنَا لَا قَالَ لَكِنِّي رَأَيْتُ اللَّيْلَةَ رَجُلَيْنِ أَتَيَانِي فَأَخَذَا بِيَدِي فَأَخْرَجَانِي إِلَى الْأَرْضِ الْمُقَدَّسَةِ فَإِذَا رَجُلٌ جَالِسٌ وَرَجُلٌ قَائِمٌ بِيَدِهِ كَلُّوبٌ مِنْ حَدِيدٍ قَالَ بَعْضُ أَصْحَابِنَا عَنْ مُوسَى إِنَّهُ يُدْخِلُ ذَلِكَ الْكَلُّوبَ فِي شِدْقِهِ حَتَّى يَبْلُغَ قَفَاهُ ثُمَّ يَفْعَلُ بِشِدْقِهِ الْآخَرِ مِثْلَ ذَلِكَ وَيَلْتَئِمُ شِدْقُهُ هَذَا فَيَعُودُ فَيَصْنَعُ مِثْلَهُ قُلْتُ مَا هَذَا قَالَا انْطَلِقْ فَانْطَلَقْنَا حَتَّى أَتَيْنَا عَلَى رَجُلٍ مُضْطَجِعٍ عَلَى قَفَاهُ وَرَجُلٌ قَائِمٌ عَلَى رَأْسِهِ بِفِهْرٍ أَوْ صَخْرَةٍ فَيَشْدَخُ بِهِ رَأْسَهُ فَإِذَا ضَرَبَهُ تَدَهْدَهَ الْحَجَرُ فَانْطَلَقَ إِلَيْهِ لِيَأْخُذَهُ فَلَا يَرْجِعُ إِلَى هَذَا حَتَّى يَلْتَئِمَ رَأْسُهُ وَعَادَ رَأْسُهُ كَمَا هُوَ فَعَادَ إِلَيْهِ فَضَرَبَهُ قُلْتُ مَنْ هَذَا قَالَا انْطَلِقْ فَانْطَلَقْنَا إِلَى ثَقْبٍ مِثْلِ التَّنُّورِ أَعْلَاهُ ضَيِّقٌ وَأَسْفَلُهُ وَاسِعٌ يَتَوَقَّدُ تَحْتَهُ نَارًا فَإِذَا اقْتَرَبَ ارْتَفَعُوا حَتَّى كَادَ أَنْ يَخْرُجُوا فَإِذَا خَمَدَتْ رَجَعُوا فِيهَا وَفِيهَا رِجَالٌ وَنِسَاءٌ عُرَاةٌ فَقُلْتُ مَنْ هَذَا قَالَا انْطَلِقْ فَانْطَلَقْنَا حَتَّى أَتَيْنَا عَلَى نَهَرٍ مِنْ دَمٍ فِيهِ رَجُلٌ قَائِمٌ عَلَى وَسَطِ النَّهَرِقَالَ يَزِيدُ وَوَهْبُ بْنُ جَرِيرٍ عَنْ جَرِيرِ بْنِ حَازِمٍ وَعَلَى شَطِّ النَّهَرِ رَجُلٌ بَيْنَ يَدَيْهِ حِجَارَةٌ فَأَقْبَلَ الرَّجُلُ الَّذِي فِي النَّهَرِ فَإِذَا أَرَادَ أَنْ يَخْرُجَ رَمَى الرَّجُلُ بِحَجَرٍ فِي فِيهِ فَرَدَّهُ حَيْثُ كَانَ فَجَعَلَ كُلَّمَا جَاءَ لِيَخْرُجَ رَمَى فِي فِيهِ بِحَجَرٍ فَيَرْجِعُ كَمَا كَانَ فَقُلْتُ مَا هَذَا قَالَا انْطَلِقْ فَانْطَلَقْنَا حَتَّى انْتَهَيْنَا إِلَى رَوْضَةٍ خَضْرَاءَ فِيهَا شَجَرَةٌ عَظِيمَةٌ وَفِي أَصْلِهَا شَيْخٌ وَصِبْيَانٌ وَإِذَا رَجُلٌ قَرِيبٌ مِنْ الشَّجَرَةِ بَيْنَ يَدَيْهِ نَارٌ يُوقِدُهَا فَصَعِدَا بِي فِي الشَّجَرَةِ وَأَدْخَلَانِي دَارًا لَمْ أَرَ قَطُّ أَحْسَنَ مِنْهَا فِيهَا رِجَالٌ شُيُوخٌ وَشَبَابٌ وَنِسَاءٌ وَصِبْيَانٌ ثُمَّ أَخْرَجَانِي مِنْهَا فَصَعِدَا بِي الشَّجَرَةَ فَأَدْخَلَانِي دَارًا هِيَ أَحْسَنُ وَأَفْضَلُ فِيهَا شُيُوخٌ وَشَبَابٌ قُلْتُ طَوَّفْتُمَانِي اللَّيْلَةَ فَأَخْبِرَانِي عَمَّا رَأَيْتُ قَالَا نَعَمْ أَمَّا الَّذِي رَأَيْتَهُ يُشَقُّ شِدْقُهُ فَكَذَّابٌ يُحَدِّثُ بِالْكَذْبَةِ فَتُحْمَلُ عَنْهُ حَتَّى تَبْلُغَ الْآفَاقَ فَيُصْنَعُ بِهِ إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ وَالَّذِي رَأَيْتَهُ يُشْدَخُ رَأْسُهُ فَرَجُلٌ عَلَّمَهُ اللَّهُ الْقُرْآنَ فَنَامَ عَنْهُ بِاللَّيْلِ وَلَمْ يَعْمَلْ فِيهِ بِالنَّهَارِ يُفْعَلُ بِهِ إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ وَالَّذِي رَأَيْتَهُ فِي الثَّقْبِ فَهُمْ الزُّنَاةُ وَالَّذِي رَأَيْتَهُ فِي النَّهَرِ آكِلُوا الرِّبَا وَالشَّيْخُ فِي أَصْلِ الشَّجَرَةِ إِبْرَاهِيمُ عَلَيْهِ السَّلَام وَالصِّبْيَانُ حَوْلَهُ فَأَوْلَادُ النَّاسِ وَالَّذِي يُوقِدُ النَّارَ مَالِكٌ خَازِنُ النَّارِ وَالدَّارُ الْأُولَى الَّتِي دَخَلْتَ دَارُ عَامَّةِ الْمُؤْمِنِينَ وَأَمَّا هَذِهِ الدَّارُ فَدَارُ الشُّهَدَاءِ وَأَنَا جِبْرِيلُ وَهَذَا مِيكَائِيلُ فَارْفَعْ رَأْسَكَ فَرَفَعْتُ رَأْسِي فَإِذَا فَوْقِي مِثْلُ السَّحَابِ قَالَا ذَاكَ مَنْزِلُكَ قُلْتُ دَعَانِي أَدْخُلْ مَنْزِلِي قَالَا إِنَّهُ بَقِيَ لَكَ عُمُرٌ لَمْ تَسْتَكْمِلْهُ فَلَوْ اسْتَكْمَلْتَ أَتَيْتَ مَنْزِلَكَ
हमरा सब के कहलक अछि [मूसा बिन इस्माइल] हमरा सब के कहलक अछि [जरीर बिन हाजिम] हमरा सब के [अबू राजा'] [समराह बिन जुंदाब] स कहलक अछि; नबी केरऽ रिवाज छेलै, सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम, कि जब॑ हुनी एगो नमाज पूरा करी क॑ हमरा सिनी के तरफ मुँह करी क॑ कहलकै, ‘अहाँ सब म॑ स॑ केकरा काल्हि रात सपना देखलऽ गेलै’ । ओ - सम्राह बिन जुंडाब - कहलनि, : 'जँ ककरो सपना देखलक तखन ओ व्यक्ति ओकरा कहत, तखने ओ कहलक,: 'मा स्या-अल्लाह' -अल्लाह केर इच्छा सँ-'। एक आओर दिन ओ हमरा सभसँ पुछलनि: 'की अहाँ सभ मे सँ कियो सपना देखैत छी?'. हम उत्तर देलियनि: 'किछु नहि'। ओ कहलनि: 'मुदा काल्हि राति हमरा सपना आयल जे दू गोटे हमरा लग आयल छलाह आ दुनू गोटे हमर हाथ पकड़ि हमरा एकटा पवित्र भूमि - अल मुकद्दसाह - पर ल' गेलाह, पता चलल जे एकटा आदमी ठाढ़ छल आ दोसर बैसल छल आ हाथ मे लोहाक छड़ी पकड़ने छल जकर छोर मोड़ल छल - प्रायः किछु लटकेबाक लेल -।' हमरा लोकनिक किछु संगी लोकनि मूसा सँ कहलनि जे: लोहाक छड़ी ओहि आदमीक मुँहक एक कात मे - दाढ़ सँ - ताबत धरि घुसा देल गेल छल जाबत धरि ओ ओकर गरदनिक पाछू मे नहि घुसि गेल छल | तखन मुँहक दोसर कात सेहो वैह काज होइत छलैक, फेर मुँहसँ निकालि फेरसँ घुसा देल जाइत छलैक, इत्यादि। हम पुछलियनि: 'एकर की अर्थ अछि?' हमरा ढोबैत दुनू आदमी कहलक जे जाउ। तेँ दोसर ठाम गेलहुँ आ एकटा आदमी लग पहुँचलहुँ जे गरदनिक पाछू पड़ल छल, जखन कि दोसर आदमी माथ तोड़बाक लेल पाथर वा पैघ पाथर पकड़ने माथ पर ठाढ़ छल । जखन ओ ओकरा पर प्रहार केलक तखन पाथर ओकर माथ कुचललक। तेँ ओ आदमी ओकरा लेबाक लेल ओकरा लग गेल आ जा धरि ओकर माथ अपन मूल अवस्था मे नहि आबि गेलै ता धरि ओ ई काज नहि छोड़लक, फेर ओकरा फेर सँ पाथर सँ मारि देलकैक जा धरि ओ कुचलल नहि गेलैक। हम पुछलियनि: 'ई आदमी के अछि?' दुनू गोटे बजलाह - जाउ। अस्तु, हमसब ताबत धरि विदा भेलहुँ जाबत धरि अग्निकुंड सन छेद पर नहि पहुँचि गेलहुँ जतय ऊपर संकीर्ण आ नीचाँ चौड़ा आ नीचाँ मे आगि जराओल जाइत छल जे जँ आगि लग आनल जाइत छल तँ ओ सभ - ओहि मे बैसल लोक - उठि जाइत छल आ जखन बुझा जाइत छल तखन ओहि मे बैसल लोक घुरि जाइत छल, ओहि मे रहनिहार पुरुष-पुरुष सँ बनल छल | हम पुछलियनि: 'के छथि?'। दुनू गोटे उत्तर देलखिन: 'जाउ'। अस्तु, हमसब ताबत धरि विदा भेलहुँ जाबत धरि एकटा एहन नदी पर नहि पहुँचलहुँ जकर पानि खून छल, बीच नदी मे एकटा आदमी ठाढ़ छल'। कहलक, [यजीद] आ [वहब बिन जरीर] [जरीर बिन हाजिम] सँ: 'आ नदीक कात मे एकटा आदमी छल जे पाथर पकड़ने छल।' बीच नदी मे बैसल व्यक्ति जखन हुनका सोझाँ आबि नदी सँ बाहर निकलबाक इरादा रखैत छल तखन पाथर पकड़ने आदमी हुनका मुँह दिस पाथर फेकि दैत छल जाबत धरि ओ बीच नदी मे अपन मूल स्थान पर वापस नहि आबि जाइत छल, आ एहने-एहने, जखन-जखन नदी सँ बाहर निकलबाक इच्छा होइत छल तखन हुनका पाथर फेकि देल जाइत छल जाहि सँ ओ अपन मूल स्थान पर वापस आबि जाइत छल | हम पुछलियनि: 'एकर की मतलब?' दुनू गोटे उत्तर देलखिन: 'जाउ'। अस्तु हम सब गेलहुँ जाबत हम सब एकटा हरियर गाछी मे नहि पहुँचलहुँ जखन कि ओकर नीचाँ एकटा बूढ़ आ बच्चा सब छल आ ओहि गाछक लग मे एकटा आदमी छल जे आगि पकड़ने छल, जखन ओ आगि जरा देलक तखन हमरा गाछ पर ऊपर अननिहार दुनू आदमी हमरा एकटा घर मे राखि देलक - एकटा गाम - जाहि तरहक हम पहिने कहियो नहि देखने रही आ ओहि मे पुरुष, बूढ़, नवतुरिया, महिला आ बच्चा सब छल तखन ओ सब हमरा ओतय सँ बाहर निकालि लेलक आ अनलक हमरा फेर गाछ पर ऊपर, फेर हमरा एकटा नीक आ सुन्दर घर मे राखि देलक, जाहि मे बूढ़-पुरान आ नवतुरिया छल। हम कहलियनि: 'आइ राति हमरा घुमा दियौक आ जे देखलहुँ ताहि पर बुझा दियौक।' तेँ ओ सभ कहलक: ‘बहुत नीक। रहल बात जकर मुँह लोहासँ छेदल देखलहुँ ओ एहन व्यक्ति अछि जेकरा झूठ बाजब नीक लगैत छैक आ जखन ओ बजैत अछि तऽ सदिखन झूठ बाजैत अछि , तेँ ओकरा क्षितिज पर ल' जाइत छैक आ ओकरा संग कयामतक दिन धरि एहने व्यवहार कयल जायत । रहल बात जे आदमी के माथ टूटैत देखलहुं त ओ एहन आदमी छल जिनका अल्लाह कुरान सिखा देने छल, फेर एक राति सुतल छल मुदा दिन मे एकर अमल नहि केलक, आ ओकरा संग कयामत तक एहन व्यवहार होयत। आ जेकरा आगि के भट्ठी में देखलौं ओ व्यभिचारी छैथ, आ जे नदी में देखलौं ओ सूदखोर छैथ, आ गाछ के नीचा बुढ़ा पैगम्बर इब्राहिम (स.अ.व.) छैथ, आ हुनकर आसपास के बच्चा सब मनुष्य के संतान छैथ। रहल बात आगि जरेनिहारक त ’ ओ नरकक रक्षक अछि , आ अहाँ जे पहिल घर मे प्रवेश केलहुँ से सभ आस्तिकक घर अछि , आ ई घर शहीदक घर अछि , आ हम जिब्राईल छी आ ई माइकल छी , तेँ माथ उठाउ । तेँ हम माथ उठेलहुँ तऽ माथक ऊपर मेघ सन किछु छल । दुनू गोटे बजलाह, "ओहि ठाम अहाँक स्थान अछि।" हम कहलियनि, "हमरा अपन घर मे घुसय दिअ।" दुनू गोटे बजलाह, "अहाँ सभक जीवन एखन धरि समाप्त नहि भेल अछि, जखन ओकर अंत होयत तखन अहाँ सभ अपन घर मे अवश्य प्रवेश करब।"