हदीस
Larangan meminta ampun di dunia untuk ayah Nabi Ibrahim yang kafir
Imam Nasa'i : 2009أَخْبَرَنَا إِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ أَبِي الْخَلِيلِ عَنْ عَلِيٍّ قَالَسَمِعْتُ رَجُلًا يَسْتَغْفِرُ لِأَبَوَيْهِ وَهُمَا مُشْرِكَانِ فَقُلْتُ أَتَسْتَغْفِرُ لَهُمَا وَهُمَا مُشْرِكَانِ فَقَالَ أَوَ لَمْ يَسْتَغْفِرْ إِبْرَاهِيمُ لِأَبِيهِ فَأَتَيْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَذَكَرْتُ ذَلِكَ لَهُ فَنَزَلَتْ{ وَمَا كَانَ اسْتِغْفَارُ إِبْرَاهِيمَ لِأَبِيهِ إِلَّا عَنْ مَوْعِدَةٍ وَعَدَهَا إِيَّاهُ }
हमनी के [इशहाक बिन मंसूर] के जानकारी देके उ कहले कि; हमनी के [अब्दुररहमान] से [सुफयान] से [अबू इशक] से [अबुल खलील] से [अली] से बतवले बाड़े उ कहले; सुनले रहनी कि केहू अपना माई-बाबूजी खातिर माफी मांगत रहे जे दुनु मुश्रिक रहले, त हम ओकरा से पूछनी; 'का तू दुनु जाना खातिर माफी मांगत बाड़ू, भले ऊ लोग मुश्रिक होखे?' उ जवाब देले, 'का पैगम्बर इब्राहिम भी अपना पिता खातिर माफी ना मंगले रहले?' तब हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिलनी आ हम उनुका के एह बारे में बतवनी, तब आयत उतरल कि 'आ इब्राहिम के माफी के निहोरा - अल्लाह से - उनुका पिता खातिर कुछुओ ना रहे सिवाय एगो वादा के वजह से जवन उ अपना पिता से कईले रहले'। -प्रश्न के बा। तौबाह 9: 114- 114 पर बा।