हदीस
Hukuman rajam untuk zina tertera dalam kitab Taurat
Imam Abu Dawud : 3856حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ قَالَ قَرَأْتُ عَلَى مِالِكِ بْنِ أَنَسٍ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ أَنَّهُ قَالَإِنَّ الْيَهُودَ جَاءُوا إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَذَكَرُوا لَهُ أَنَّ رَجُلًا مِنْهُمْ وَامْرَأَةً زَنَيَا فَقَالَ لَهُمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا تَجِدُونَ فِي التَّوْرَاةِ فِي شَأْنِ الزِّنَا فَقَالُوا نَفْضَحُهُمْ وَيُجْلَدُونَ فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَلَامٍ كَذَبْتُمْ إِنَّ فِيهَا الرَّجْمَ فَأَتَوْا بِالتَّوْرَاةِ فَنَشَرُوهَا فَجَعَلَ أَحَدُهُمْ يَدَهُ عَلَى آيَةِ الرَّجْمِ ثُمَّ جَعَلَ يَقْرَأُ مَا قَبْلَهَا وَمَا بَعْدَهَا فَقَالَ لَهُ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَلَامٍ ارْفَعْ يَدَيْكَ فَرَفَعَهَا فَإِذَا فِيهَا آيَةُ الرَّجْمِ فَقَالُوا صَدَقَ يَا مُحَمَّدُ فِيهَا آيَةُ الرَّجْمِ فَأَمَرَ بِهِمَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَرُجِمَاقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ فَرَأَيْتُ الرَّجُلَ يَحْنِي عَلَى الْمَرْأَةِ يَقِيهَا الْحِجَارَةَ
हमनी के बतवले बाड़े [अब्दुल्लाह बिन मसलमाह] उ कहले बाड़े; हम [मलिक बिन अनस] से पहिले [नाफी] से [इब्न उमर] से पढ़ले रहनी कि उ कहले रहले कि, 'यहूदी नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे आईल रहले, उ लोग उनुका सोझा बतवले रहले कि ओ लोग में से एगो आदमी अवुरी एगो महिला व्यभिचार कईले बाड़े। तब रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ओह लोग से कहले कि व्यभिचार के बारे में तोराह में रउरा कवन कानून मिलत बा? उ लोग जवाब देले कि, 'हम अपराधी के निंदा क के कोड़ा मारब'। अब्दुल्ला बिन सलाम कहले कि तू झूठ बोलत बाड़ू! तोराह में पत्थरबाजी के आज्ञा बा'। एकरा बाद उ लोग तौराह लेके आके खोलले। एकरा बाद ओहमें से एगो पत्थरबाजी के छंद के हाथ से ढंक दिहलस, फेर ओकरा से पहिले आ बाद के श्लोक पढ़लस - माने कि जवन हिस्सा हाथ से ढंकल रहे ओकरा के ना पढ़लस -। अब्दुल्ला बिन सलाम तब कहले कि हाथ उठाईं! हाथ उठवले त उनका एगो श्लोक मिलल जवन पत्थरबाजी के बात करत रहे। तब ऊ लोग कहल कि हे मुहम्मद, ऊ सही कहत बाड़न! तोराह में वाकई में पत्थरबाजी के बारे में एगो श्लोक बा।' एकरा बाद अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आदेश दिहलन कि ओह लोग के पत्थर मारल जाव, आ ओह लोग के पत्थर मार दिहल गइल.' अब्दुल्ला बिन उमर कहले कि, हम देखनी कि उ आदमी अपना महिला के गले लगावत रहे ताकि उ पत्थर से ना टकराए।