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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



- Dzikir & Doa Kumpulan doa-doa insidental Doa ketika turun hujan: ALLAHUMMA SHAIBAN NAAFI'A (YA ALLAH JADIKANLAH CURAHAN YANG PENUH KEBERKAHAN)

हदीस :
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Doa ketika turun hujan: ALLAHUMMA SHAIBAN NAAFI'A (YA ALLAH JADIKANLAH CURAHAN YANG PENUH KEBERKAHAN)
Imam Ibnu Majah : 3879

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ الْمِقْدَامِ بْنِ شُرَيْحٍ عَنْ أَبِيهِ الْمِقْدَامِ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ عَائِشَةَ أَخْبَرَتْهُأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا رَأَى سَحَابًا مُقْبِلًا مِنْ أُفُقٍ مِنْ الْآفَاقِ تَرَكَ مَا هُوَ فِيهِ وَإِنْ كَانَ فِي صَلَاتِهِ حَتَّى يَسْتَقْبِلَهُ فَيَقُولُ اللَّهُمَّ إِنَّا نَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا أُرْسِلَ بِهِ فَإِنْ أَمْطَرَ قَالَ اللَّهُمَّ سَيْبًا نَافِعًا مَرَّتَيْنِ أَوْ ثَلَاثَةً وَإِنْ كَشَفَهُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ وَلَمْ يُمْطِرْ حَمِدَ اللَّهَ عَلَى ذَلِكَ

हमनी के बतवले बाड़े [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] हमनी के [यजीद बिन अल मिकदम बिन स्यूरईह] [उनकर पिता अल मिकदाम] से [अपना पिता] से बतवले बाड़े कि [‘ऐस्याह] उनुका के सूचित कईले रहले कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब उ ऊँच क्षितिज के बीच क्षितिज में करिया बादल के चलत देखले रहले, तब उ आपन सभ गतिविधि छोड़ देले नमाज में, जब तक कि उ ओ लोग के ओर ना देख के दुआ ना कईले कि, 'हे अल्लाह, हमनी के आपके शरण लेवेनी, जवन बुराई तू अपना संगे ले आवेले'। अगर बरखा होखे त ऊ दुआ करेला: 'अल्लाहुम्मा शैबन नाफीआ -हे अल्लाह, एकरा के बरकत से भरल बौछार बनाईं-'। -उ पढ़ले- दू-तीन बेर। आ अगर अल्लाह अज्जा व जल्ला एकरा के हटा दिहले आ बरखा ना होखे त ऊ - आभारी रहीं - ओह सब खातिर अल्लाह के स्तुति करीहें'.

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