इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



- Dzikir & Doa Kelanjutan dzikir pagi Membaca: ALLAHUMMA INNI ASHBAHTU USYHIDUKA ...4x - barangsiapa membacanya sebanyak empat kali maka Allah akan membebaskan semua anggota badannya dari neraka
Hadith Search Results :
Total Hadith : 1
Hadith Representative
Membaca: ALLAHUMMA INNI ASHBAHTU USYHIDUKA ...4x - barangsiapa membacanya sebanyak empat kali maka Allah akan membebaskan semua anggota badannya dari neraka
Imam Abu Dawud : 4407

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ صَالِحٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَبِي فُدَيْكٍ قَالَ أَخْبَرَنِي عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَبْدِ الْمَجِيدِ عَنْ هِشَامِ بْنِ الْغَازِ بْنِ رَبِيعَةَ عَنْ مَكْحُولٍ الدِّمَشْقِيِّ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ قَالَ حِينَ يُصْبِحُ أَوْ يُمْسِي اللَّهُمَّ إِنِّي أَصْبَحْتُ أُشْهِدُكَ وَأُشْهِدُ حَمَلَةَ عَرْشِكَ وَمَلَائِكَتَكَ وَجَمِيعَ خَلْقِكَ أَنَّكَ أَنْتَ اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ وَأَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُكَ وَرَسُولُكَ أَعْتَقَ اللَّهُ رُبُعَهُ مِنْ النَّارِ فَمَنْ قَالَهَا مَرَّتَيْنِ أَعْتَقَ اللَّهُ نِصْفَهُ وَمَنْ قَالَهَا ثَلَاثًا أَعْتَقَ اللَّهُ ثَلَاثَةَ أَرْبَاعِهِ فَإِنْ قَالَهَا أَرْبَعًا أَعْتَقَهُ اللَّهُ مِنْ النَّارِ

हमसे कहिन [अहमद बिन सालिह] कहिन, हमसे कहिन [मुहम्मद बिन अबू फुदैक] उ कहिन; ने ['अब्दुर्रहमान बिन अब्दुल माजिद] से [हिस्याम इब्नुल गज़ बिन रबिया] से [मखुल अद दैमासिकी] से [अनस बिन मलिक] से रिपोर्ट किहिन है कि रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जो भी सुबह अऊर शाम पढ़त है: अल्लाहुम्मा अहिंबा उश्दुयुदुहि हमलाता अरस्यिका वा मलाइकताका वा जमीया खलकिका अन्नाका अंतअल्लाहु ला इलाहा इल्ला अंतरा वा अन्ना मुहम्मदन अबदुका वा रसुउलुका -हे अल्लाह, मैं सुबह आपसे गवाही देत रहेंव, अऊर आप सबके क्रोधित करै वालेन के लिए, अऊर सबका, आपके प्राणी, कि आप अल्लाह हैं अऊर आपके अलावा कौनो भगवान नाहीं है, अऊर मुहम्मद आपके सेवक अऊर रसूल हैं। दुइ बार, अल्लाह ओकर आधा शरीर नरक से मुक्त करि, अऊर जे तीन बार कही, अल्लाह ओकर तीन चौथाई शरीर का नरक से मुक्त करि, अऊर जे चार बार पढ़ी, अल्लाह ओकर सब अंगन का नरक से मुक्त करि।'

Hadith Corroboration :

Imam Abu Dawud : 4407, 4416
Imam Tirmidzi : 3423