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Lailatul qadar malam ke-27: carilah lailatul qadar pada malam ke dua puluh tujuh di bulan ramadhan
Imam Tirmidzi : 3274حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَبْدَةَ بْنِ أَبِي لُبَابَةَ وَعَاصِمٍ هُوَ ابْنُ بَهْدَلَةَ سَمِعَا زِرَّ بْنَ حُبَيْشٍ وَزِرُّ بْنُ حُبَيْشٍ يُكْنَى أَبَا مَرْيَمَ يَقُولُ قُلْتُ لِأُبَيِّ بْنِ كَعْبٍ إِنَّ أَخَاكَ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ مَسْعُودٍ يَقُولُ مَنْ يَقُمْ الْحَوْلَ يُصِبْ لَيْلَةَ الْقَدْرِفَقَالَ يَغْفِرُ اللَّهُ لِأَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ لَقَدْ عَلِمَ أَنَّهَا فِي الْعَشْرِ الْأَوَاخِرِ مِنْ رَمَضَانَ وَأَنَّهَا لَيْلَةُ سَبْعٍ وَعِشْرِينَ وَلَكِنَّهُ أَرَادَ أَنْ لَا يَتَّكِلَ النَّاسُ ثُمَّ حَلَفَ لَا يَسْتَثْنِي أَنَّهَا لَيْلَةُ سَبْعٍ وَعِشْرِينَ قَالَ قُلْتُ لَهُ بِأَيِّ شَيْءٍ تَقُولُ ذَلِكَ يَا أَبَا الْمُنْذِرِ قَالَ بِالْآيَةِ الَّتِي أَخْبَرَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَوْ بِالْعَلَامَةِ أَنَّ الشَّمْسَ تَطْلُعُ يَوْمَئِذٍ لَا شُعَاعَ لَهَاقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ
हमरा सब के कहलक अछि [इब्न अबू उमर] हमरा सब के [सुफयान] के [अब्दाह बिन अबू लुबाबाह] आ ['अशिम अर्थात इब्न बहदलाह] स कहलक अछि जे ओ सब [जिरब हुबैसी] के सुनने छथि जिनका अबू मरियम के कुन्या देल गेल छल, ओ कहलनि; हम [उबै बिन काब] स कहलियनि जे अहाँक भाई अब्दुल्ला बिन मसूद कहलनि; जे साल मे एक बेर नमाज पढ़त ओकरा लैलातुल कदर भेटत। तखन उबाई बजलाह; अबू अब्दुर रहमान पर अल्लाह कृपा करथिन; सचमुच, हुनका पहिने सं बुझल छलनि जे लैलातुल कदर रमजान मासक अंतिम दस राति अर्थात बाहत्तरि राति मे छथि, मुदा ओ चाहैत छलाह जे लोक हुनका पर निर्भर नहि हो. तखन ओ शपथ लेलनि आ भगवानक इच्छा नहि कहलनि जे ओ राति सत्ताइसम राति छल | जिरर कहलक; हम कहलियनि; अहाँ कोन आधार पर कहैत छी जे हे अबू अल मुंडजीर? ओ कहलनि; एकटा एहन निशानी के संग जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम द्वारा घोषित कयल गेल छल या एकटा संकेत के संग जे ओहि दिन उगैत सूर्य के कोनो इजोत नहि छल | अबू ईसा कहलनि; ई हदीस एकटा प्रामाणिक हसन हदीस अछि।