प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 1876
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ أَخْبَرَنَا مَالِكٌ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَاأَنَّ رِجَالًا مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُرُوا لَيْلَةَ الْقَدْرِ فِي الْمَنَامِ فِي السَّبْعِ الْأَوَاخِرِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَرَى رُؤْيَاكُمْ قَدْ تَوَاطَأَتْ فِي السَّبْعِ الْأَوَاخِرِ فَمَنْ كَانَ مُتَحَرِّيهَا فَلْيَتَحَرَّهَا فِي السَّبْعِ الْأَوَاخِرِ
[अब्दुल्ला बिन यूसुफ] ने हमें [मलिक] [नफी] से [इब्न उमर (अल्लाह उन पर प्रसन्न हो) से बताया कि पैगंबर के साथियों में से एक (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने आखिरी सात रातों में एक सपने में लैलत अल-क़द्र देखा। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "मैं देखता हूं कि लैलत अल-क़द्र के बारे में तुम्हारे सपने आखिरी सात रातों में आते हैं, इसलिए जो कोई भी अल्लाह की तलाश करके उसके करीब जाना चाहता है, उसे आखिरी सात रातों में ऐसा करना चाहिए।"