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Perintah Rasulullah untuk meluruskan shaf supaya tidak menimbulkan permusuhan antara satu dengan lainnya
Imam Tirmidzi : 210حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ سِمَاكِ بْنِ حَرْبٍ عَنْ النُّعْمَانِ بْنِ بَشِيرٍ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُسَوِّي صُفُوفَنَا فَخَرَجَ يَوْمًا فَرَأَى رَجُلًا خَارِجًا صَدْرُهُ عَنْ الْقَوْمِ فَقَالَ لَتُسَوُّنَّ صُفُوفَكُمْ أَوْ لَيُخَالِفَنَّ اللَّهُ بَيْنَ وُجُوهِكُمْقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ وَالْبَرَاءِ وَجَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ وَأَنَسٍ وَأَبِي هُرَيْرَةَ وَعَائِشَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ النُّعْمَانِ بْنِ بَشِيرٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ مِنْ تَمَامِ الصَّلَاةِ إِقَامَةُ الصَّفِّ وَرُوِيَ عَنْ عُمَرَ أَنَّهُ كَانَ يُوَكِّلُ رِجَالًا بِإِقَامَةِ الصُّفُوفِ فَلَا يُكَبِّرُ حَتَّى يُخْبَرَ أَنَّ الصُّفُوفَ قَدْ اسْتَوَتْ وَرُوِيَ عَنْ عَلِيٍّ وَعُثْمَانَ أَنَّهُمَا كَانَا يَتَعَاهَدَانِ ذَلِكَ وَيَقُولَانِ اسْتَوُوا وَكَانَ عَلِيٌّ يَقُولُ تَقَدَّمْ يَا فُلَانُ تَأَخَّرْ يَا فُلَانُ
हमरा सभकेँ कहि देने अछि [कुतैबा] कहलक; हमरा सभ केँ [अबू अवानाह] केँ [सिमक बिन हरब] सँ [अन नु'मान बिन बस्यर] सँ कहने छथि ओ कहलनि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमर नमाज रेखा सीधा करैत छलाह। अस्तु एक दिन ओ बाहर आबि गेलाह आ देखलनि जे छाती आन सभसँ बेसी आगू उभड़ल छलनि, ओ कहलनि: 'अहाँ अपन पंक्ति सोझ करू नहि तऽ अल्लाह अहाँकेँ बाँटि देत।' इमाम तिरमिजी कहलनि जे, एहि अध्याय मे जाबिर बिन सम्राह, अल बर्रा, जाबिर बिन अब्दुल्लाह, अनस, अबू हुरैरा आ 'ऐस्याह' के हदीस सेहो अछि | अबू ईसा कहलनि; 'नु'मान बिन बसिर के ई हदीस हसन प्रामाणिक अछि।' नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स रिवायत अछि, जे ओ कहलनि: 'नमाज के पूर्णता के हिस्सा नमाज के पंक्ति के सीधा करब अछि'। उमर स इहो रिवायत अछि जे ओ किछु आदमी कए नमाज क रेखा कए सोझ करबाक आदेश देलथि, आ जा धरि नमाज क रेखा सीधा हेबाक खबरि नहि भेटल ता धरि ओ तकबीर नहि शुरू केलथि। अली आ उस्मान स इहो रिवायत अछि जे ओ सब सदिखन एहि पर ध्यान दैत छलाह। दुनू गोटे बजलाह, "अपन प्रार्थनाक रेखा सोझ करू।" अली कखनो काल कहैत छलाह, "आगू बढ़ू हे फल्लाँ, घुरि जाउ हे फल्लाँ।"