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Rasulullah shalat menghadap ke baitul maqdis bersama para sahabatnya selama enam belas bulan, kemudian terjadi peralihan arah kiblat ke ka’bah setelah itu
Imam Tirmidzi : 312حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ إِسْرَائِيلَ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ قَالَلَمَّا قَدِمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْمَدِينَةَ صَلَّى نَحْوَ بَيْتِ الْمَقْدِسِ سِتَّةَ أَوْ سَبْعَةَ عَشَرَ شَهْرًا وَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُحِبُّ أَنْ يُوَجِّهَ إِلَى الْكَعْبَةِ فَأَنْزَلَ اللَّهُ تَعَالَى{ قَدْ نَرَى تَقَلُّبَ وَجْهِكَ فِي السَّمَاءِ فَلَنُوَلِّيَنَّكَ قِبْلَةً تَرْضَاهَا فَوَلِّ وَجْهَكَ شَطْرَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ }فَوَجَّهَ نَحْوَ الْكَعْبَةِ وَكَانَ يُحِبُّ ذَلِكَ فَصَلَّى رَجُلٌ مَعَهُ الْعَصْرَ ثُمَّ مَرَّ عَلَى قَوْمٍ مِنْ الْأَنْصَارِ وَهُمْ رُكُوعٌ فِي صَلَاةِ الْعَصْرِ نَحْوَ بَيْتِ الْمَقْدِسِ فَقَالَ هُوَ يَشْهَدُ أَنَّهُ صَلَّى مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَّهُ قَدْ وَجَّهَ إِلَى الْكَعْبَةِ قَالَ فَانْحَرَفُوا وَهُمْ رُكُوعٌقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ ابْنِ عُمَرَ وَابْنِ عَبَّاسٍ وَعُمَارَةَ بْنِ أَوْسٍ وَعَمْرِو بْنِ عَوْفٍ الْمُزَنِيِّ وَأَنَسٍ قَالَ أَبُو عِيسَى وَحَدِيثُ الْبَرَاءِ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ رَوَاهُ سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَ كَانُوا رُكُوعًا فِي صَلَاةِ الصُّبْحِ قَالَ أَبُو عِيسَى وَحَدِيثُ ابْنِ عُمَرَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ
हमरा सभकेँ कहि देने अछि [हन्नाद] कहलनि; हमरा सभ केँ [वाकी'] केँ [इजराइल] सँ [इशक] सँ [अल बारा` बिन अजीब] सँ कहलक अछि ओ कहलनि; 'जखन रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मदीना पहुँचलाह तखन हुनका छह-सतरह मास धरि बैतुल मकदीक मुँहे नमाज पढ़बाक समय भेटलनि । एम्हर अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ई नीक लागलनि जे जँ ओ काबा के सामना करथि, तेँ अल्लाह ई आयत उतारलनि: -सत्ते, हम सभ -प्रायः- अहाँक मुँह आकाश दिस घुमाओल देखैत छी, तखन हम अहाँ केँ सचमुच ओहि किबला दिस घुमा देब जे अहाँ केँ नीक लगैत अछि। भव्य मस्जिद दिस मुँह घुमाउ। तें ओ किबला केर दिशा दिस मुँह केलनि, आ से हुनका नीक लागलनि'. तखन हुनका संग कियो अस्र नमाज पढ़ैत छल । एकरऽ बाद अंसार केरऽ कई लोगऽ के पास स॑ गुजरी गेलै जे बैतुल मकदीस के दिशा के तरफ मुँह करी क॑ दुपहर के नमाज म॑ प्रणाम करी रहलऽ छेलै, ई लेली हुनी कहलकै - गवाही दै के दौरान - कि हुनी नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ नमाज पढ़लकै, आरू वू काबा के तरफ मुँह करी क॑ छेलै’ । अल बारा` कहलक; 'तखन जनता प्रणामक अवस्था मे काबा दिस घुमि गेल।' ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे इब्न उमर, इब्नू अब्बास, उमर बिन औस, अमरू बिन औफ अल मुजानी आ अनस' सँ सेहो रिवायत अछि | अबू ईसा कहलनि; ‘अल बारा हदीस’ एकटा प्रामाणिक हसन हदीस अछि आ [सुफयान अतस त्सौरी] एकरा [अबू इशक] स रिवायत केने छथि, हमरा सब के बता देने छथि [हन्नाद] कहलनि; हमरा सब के [वाकी'] के [सुफयान] स [अब्दुल्लाह बिन दिनार] स [इब्न उमर] स कहलक अछि ओ कहलनि; 'फजर नमाज मे प्रणाम केलनि'। अबू ईसा कहलनि; 'इब्न उमर के हदीस हसन प्रामाणिक हदीस छै'।