Hadith Representative
Shalat pada malam dan siang hari itu adalah dua rakaat-dua rakat, dan bertasyahud setiap dua rakaat
Imam Tirmidzi : 543حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ يَعْلَى بْنِ عَطَاءٍ عَنْ عَلِيٍّ الْأَزْدِيِّ عَنْ ابْنِ عُمَرَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ صَلَاةُ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ مَثْنَى مَثْنَىقَالَ أَبُو عِيسَى اخْتَلَفَ أَصْحَابُ شُعْبَةَ فِي حَدِيثِ ابْنِ عُمَرَ فَرَفَعَهُ بَعْضُهُمْ وَأَوْقَفَهُ بَعْضُهُمْ وَرُوِي عَنْ عَبْدِ اللَّهِ الْعُمَرِيِّ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَحْوُ هَذَا وَالصَّحِيحُ مَا رُوِيَ عَنْ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ صَلَاةُ اللَّيْلِ مَثْنَى مَثْنَى وَرَوَى الثِّقَاتُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَلَمْ يَذْكُرُوا فِيهِ صَلَاةَ النَّهَارِ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ أَنَّهُ كَانَ يُصَلِّي بِاللَّيْلِ مَثْنَى مَثْنَى وَبِالنَّهَارِ أَرْبَعًا وَقَدْ اخْتَلَفَ أَهْلُ الْعِلْمِ فِي ذَلِكَ فَرَأَى بَعْضُهُمْ أَنَّ صَلَاةَ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ مَثْنَى مَثْنَى وَهُوَ قَوْلُ الشَّافِعِيِّ وَأَحْمَدَ و قَالَ بَعْضُهُمْ صَلَاةُ اللَّيْلِ مَثْنَى مَثْنَى وَرَأَوْا صَلَاةَ التَّطَوُّعِ بِالنَّهَارِ أَرْبَعًا مِثْلَ الْأَرْبَعِ قَبْلَ الظُّهْرِ وَغَيْرِهَا مِنْ صَلَاةِ التَّطَوُّعِ وَهُوَ قَوْلُ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ وَابْنِ الْمُبَارَكِ وَإِسْحَقَ
हमरा सब के कहलक अछि [मुहम्मद बिन बस्स्यार] हमरा सब के बता देने अछि [अब्दुररहमान बिन महदी] हमरा सब के [स्यूबाह] के [या'ला बिन 'अथा'] स [अली अल अजदी] स [इब्न उमर] स नबी शलल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहलक अछि: 'राति में सुन्नत के नमाज आ दिन में दू रकात - दू रकात कयल जाइत अछि | रक'अहस'। अबू ईसा कहलनि जे, इब्न उमर के हदीस के संबंध में शुअबा के साथी सब में मतभेद छल, किछु गोटे एकरा मना क देलखिन आ किछु गोटे एकरा स्वीकार केलनि। [अब्दुल्लाह अल उमरी] स॑ [नफी’] स॑ [इब्न उमर] स॑ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ उपरोक्त हदीस केरऽ शब्दावली के रूप म॑ रिवायत करलऽ गेलऽ छै । सबसें प्रामाणिक इतिहास इब्न उमर केरऽ छै, वास्तव में पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै कि रात में सुन्नत के नमाज दू रकाअत-दू रकाअत में करलऽ जाय छै’ । आरू त्सीकाह रवीयऽ न॑ ई हदीस क॑ इब्न उमर स॑ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ बिना नहर के नमाज के जिक्र केने -दिन के दौरान- बतैलकै । आ उबैदुल्लाह सँ नफी सँ श्रीमती उमर सँ रिवायत भेल अछि जे ओ राति मे दू रकाअत-दू रकाआत आ दिन मे चारि रकाअत-चारि रकाअत सुन्नत के नमाज केने छलाह | अतः विद्वान लोकनिक एहि विषय पर अलग-अलग विचार छनि, इमाम स्याफी आ अहमदक मत छनि जे राति मे वा दिन मे सुन्नतक नमाज दू रकाअत-दू रकाअत होइत छैक, जखन कि इमाम सुफियन अतस त्सौरी, इब्न अल मुबारक आ इशाक केर मत छनि जे राति मे सुन्नतक नमाज दू रकाअत-दू रकाअत आ दिन मे चारि रकाअत होइत छैक | रकाअत-चारि रकाअत जेना धुहर या अन्य सुन्नत नमाज स पहिने चारि रकाअत के सुन्नत नमाज |