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Keutamaan shalat Dhuha di masjid seperti berperang cepat dan membawa ghanimah
Imam Ahmad : 6349حَدَّثَنَا حَسَنٌ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ حَدَّثَنِي حُيَيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ أَبَا عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْحُبُلِيَّ حَدَّثَهُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِي قَالَ بَعَثَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَرِيَّةً فَغَنِمُوا وَأَسْرَعُوا الرَّجْعَةَ فَتَحَدَّثَ النَّاسُ بِقُرْبِ مَغْزَاهُمْ وَكَثْرَةِ غَنِيمَتِهِمْ وَسُرْعَةِ رَجْعَتِهِمْ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَلَا أَدُلُّكُمْ عَلَى أَقْرَبَ مِنْهُ مَغْزًى وَأَكْثَرَ غَنِيمَةً وَأَوْشَكَ رَجْعَةً مَنْ تَوَضَّأَ ثُمَّ غَدَا إِلَى الْمَسْجِدِ لِسُبْحَةِ الضُّحَى فَهُوَ أَقْرَبُ مَغْزًى وَأَكْثَرُ غَنِيمَةً وَأَوْشَكُ رَجْعَةً
हमरा सब के कहलक अछि [हसन] हमरा सब के कहने अछि [इब्न लहिअह] हमरा [हुयई बिन अब्दुल्लाह] के कहलक अछि जे [अबू अब्दुररहमान अल हुबुली] हुनका [अब्दुल्लाह बिन अमरू बिन अल 'अश] स कहलक अछि, ओ कहलनि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सलाम सेना पठौलनि आ ओ सभ जल्दी वापस आबि घनिमाह -बिगड़ल खजाना- अनलनि। अस्तु, लोक सब एहि बात पर हंगामा करय लागल जे ओकर युद्धक्षेत्र कतेक नजदीक छैक, कतेक घोनीमा अपना संग अनने छैक, आ युद्ध सं कतेक जल्दी घर वापस आबि गेल छलैक, जाहि सं रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सलाम बजलाह: 'की अहाँ चाहब जे हम अहाँ केँ एहन युद्धक मैदान देखाबी जे नजदीक मे हो, जाहि मे ढेर रास घोनीमा हो आ जल्दी घर जा सकैत अछि? जे कियो वजूद करैत अछि आ फेर मस्जिद मे सुन्नत दुहाक नमाज करैत अछि, तखन ओ वैह अछि जेकरा लग मे युद्धक स्थान भेटि गेल अछि, कतेको घोनीमा आ जल्दी घर वापस आबि जाइत अछि?'