प्रतिनिधि हदीस
इमाम दरिमी : 2606
أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ صَالِحٍ قَالَ حَدَّثَنِي اللَّيْثُ قَالَ حَدَّثَنِي ابْنُ عَجْلَانَ عَنْ حُسَيْنِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَرْغَبُ فِي قِيَامِ اللَّيْلِ حَتَّى قَالَ وَلَوْ رَكْعَةً
हमें [अब्दुल्ला बिन सलीह] ने बताया; मुझे [लैट्स] ने बताया; मुझे [इब्न अजलान] [हुसैन बिन अब्दुल्ला बिन उबैदुल्ला बिन अब्बास] से [इकरीमा] से [इब्न अब्बास] से बताया गया है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने रात की नमाज़ की ज़ोरदार सिफ़ारिश की है जब तक कि उन्होंने यह न कहा: "भले ही यह सिर्फ़ एक रकअत हो।"