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Dzikir dan doa ketika terbangun di malam hari
Imam Bukhari : 1086حَدَّثَنَا صَدَقَةُ بْنُ الْفَضْلِ أَخْبَرَنَا الْوَلِيدُ هُوَ ابْنُ مُسْلِمٍ حَدَّثَنَا الْأَوْزَاعِيُّ قَالَ حَدَّثَنِي عُمَيْرُ بْنُ هَانِئٍ قَالَ حَدَّثَنِي جُنَادَةُ بْنُ أَبِي أُمَيَّةَ حَدَّثَنِي عُبَادَةُ بْنُ الصَّامِتِعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ تَعَارَّ مِنْ اللَّيْلِ فَقَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ الْحَمْدُ لِلَّهِ وَسُبْحَانَ اللَّهِ وَلَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَاللَّهُ أَكْبَرُ وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ ثُمَّ قَالَ اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي أَوْ دَعَا اسْتُجِيبَ لَهُ فَإِنْ تَوَضَّأَ وَصَلَّى قُبِلَتْ صَلَاتُهُ
ने सानु दस्सेया है [शदाकाह बन अल फदल] ने सानु दस्सेया है [अल वलीद], उसने मुसलमान दा पुत्तर है सानु दस्सेया है [अल अवजाई ने कहा है, बताया है ['उमैर बिन हानी'] ने कहा, बताया है [जुनादा बिन अबू उमय्याह] ने मिगी दस्सेया है [उबादा बिन अश-शमीत] ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि ने कहा कि: 'जो रात जागदा है ते पढ़दा है 'ला इलाहा इल्लाह वहदहु ला शरीका लाहु, लाहुल मुलकू वा लाहुल हमदू वा हुवा 'आला कुल्ली स्याई-इन कदीर। अलहमदुलिल्लाही वा सुभानल्लाह वा ला इलाहा इल्लाह वलाहु अकबर वा ला जौला वा ला कुव्वाता इला बिल्लाह' -इबादत दे काबिल कोई देवता नहीं सिवाय अकेले अल्लाह, उन्हा दे कोई साथी नहीं। उसी गै राज ऐ ते उसी गै सारी स्तुति ऐ ते उसी सारें चीजें उप्पर अधिकार ऐ। अल्लाह दी स्तुति ते महिमा अल्लाह दी होवे ते अल्लाह दे सिवाय कोई ईश्वर नहीं है ते अल्लाह सब तों वड्डा है ते उस दे सिवाय कोई ताकत ते मेहनत नहीं है'- फिर 'अल्लाहुमघफिरली' -'हे अल्लाह, मिगी माफ करो'- पढ़ के जारी रखो- या नमाज पढ़ के, फिर उस नू मंजूर हो जावेगा। जे वज़ूद करदा है ते फिर नमाज करदा है तां उस दी नमाज स्वीकार हो जांदी है।