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Rasulullah membaca surat al-lail pada saat shalat dhuhur
Imam Nasa'i : 970أَخْبَرَنَا إِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ سِمَاكٍ عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ قَالَكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقْرَأُ فِي الظُّهْرِ وَاللَّيْلِ إِذَا يَغْشَى وَفِي الْعَصْرِ نَحْوَ ذَلِكَ وَفِي الصُّبْحِ بِأَطْوَلَ مِنْ ذَلِكَ
हमरा सभ [इशक बिन मंसूर] केँ सूचित कए ओ कहलनि; हमरा सभ केँ [अब्दुररहमान] केँ [स्यूबाह] सँ [सिमक] सँ [जाबिर बिन समुराह] सँ कहने छथि ओ कहलनि; 'रसुलुल्लाह सल्लल्लाहुअलैहि वसल्लम दुपहर के नमाज के दौरान आ अस्र में सूरह अल लैल पढ़लनि जे एहन बुझाइत छल | एम्हर फजरक नमाज मे ओहि सँ बेसी नमहर किछु पढ़लनि।'