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Doa ruku' - 5: SUBHAANA DZIL JABARUUTI WAL MALAKUUTI WAL KIBRIYAA-I WAL 'ADZAMAH
Imam Abu Dawud : 739حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ صَالِحٍ حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ صَالِحٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ قَيْسٍ عَنْ عَاصِمِ بْنِ حُمَيْدٍ عَنْ عَوْفِ بْنِ مَالِكٍ الْأَشْجَعِيِّ قَالَقُمْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيْلَةً فَقَامَ فَقَرَأَ سُورَةَ الْبَقَرَةِ لَا يَمُرُّ بِآيَةِ رَحْمَةٍ إِلَّا وَقَفَ فَسَأَلَ وَلَا يَمُرُّ بِآيَةِ عَذَابٍ إِلَّا وَقَفَ فَتَعَوَّذَ قَالَ ثُمَّ رَكَعَ بِقَدْرِ قِيَامِهِ يَقُولُ فِي رُكُوعِهِ سُبْحَانَ ذِي الْجَبَرُوتِ وَالْمَلَكُوتِ وَالْكِبْرِيَاءِ وَالْعَظَمَةِ ثُمَّ سَجَدَ بِقَدْرِ قِيَامِهِ ثُمَّ قَالَ فِي سُجُودِهِ مِثْلَ ذَلِكَ ثُمَّ قَامَ فَقَرَأَ بِآلِ عِمْرَانَ ثُمَّ قَرَأَ سُورَةً سُورَةً
हमसे कहिन है [अहमद बिन सालिह] हमसे कहिन हैं [इब्नू वाहब] हमसे [मुआविया बिन सालिह] से [अमरू बिन कैस] से [अशिम बिन हुमैद] से ['औफ बिन मलिक अल अस्यजाई] से कहिन हैं; 'एक रात, हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के साथे प्रार्थना किहिन, फिर उ खड़ा होइके अल बकरा पत्र पढ़िन, उ दया के बारे मा आयत नाहीं पास किहिन, उ निश्चित रूप से रुकिन अऊर उनसे पूछिन, अऊर उ सजा के बारे मा आयत पास नाहीं किहिन, लेकिन उ रुकिन अऊर उनसे रक्षा माँगिन'। ऊ जारी रखिस; 'फिर उ खड़ा होइके बहुत देर तक प्रणाम किहिन, अपने प्रणाम मा उ कहिन: 'सुबहाना ज़िल जबरौती वाल मलाकुति वाल किबरिया`ई वाल 'अज़मती -महिमामंडित उ सार है जेहिमा शक्ति, राज्य, महानता अऊर महिमा के गुण हैं-'। फिर जब तक खड़े रहे तब तक सजदा करते रहे, अपने सजदा में वही बोले, उसके बाद खड़े हो गए, फिर अली इमरान का चिट्ठी पढ़े, फिर चिट्ठी पर चिट्ठी पढ़े'।