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Keutamaan Al-Fatihah: Ummul Qur’an (Al-Fatihah) adalah Assab’u al matsaani dan Al-Qur’an yang agung
Imam Bukhari : 4334حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ خُبَيْبِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ حَفْصِ بْنِ عَاصِمٍ عَنْ أَبِي سَعِيدِ بْنِ الْمُعَلَّى قَالَمَرَّ بِيَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَا أُصَلِّي فَدَعَانِي فَلَمْ آتِهِ حَتَّى صَلَّيْتُ ثُمَّ أَتَيْتُ فَقَالَ مَا مَنَعَكَ أَنْ تَأْتِيَنِي فَقُلْتُ كُنْتُ أُصَلِّي فَقَالَ أَلَمْ يَقُلْ اللَّهُ{ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اسْتَجِيبُوا لِلَّهِ وَلِلرَّسُولِ إِذَا دَعَاكُمْ لِمَا يُحْيِيكُمْ }ثُمَّ قَالَ أَلَا أُعَلِّمُكَ أَعْظَمَ سُورَةٍ فِي الْقُرْآنِ قَبْلَ أَنْ أَخْرُجَ مِنْ الْمَسْجِدِ فَذَهَبَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِيَخْرُجَ مِنْ الْمَسْجِدِ فَذَكَّرْتُهُ فَقَالَ الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ هِيَ السَّبْعُ الْمَثَانِي وَالْقُرْآنُ الْعَظِيمُ الَّذِي أُوتِيتُهُ
हमरा कहलक अछि [मुहम्मद बिन बस्स्यार] हमरा सभकेँ कहलक अछि [घुंदर] हमरा सभकेँ [शुबह] [खुबैब बिन अब्दुर रहमान]सँ [हफश बिन अशिम]सँ [अबू सैद बिन अल मुअल्ला]सँ कहलक अछि ओ कहलनि; जखन हम नमाज पढ़ैत रही तखन रसुलुल्लाह शल्लल्लाहुअलैहिवसल्लम ओहि ठाम स गुजरलाह, फेर ओ हमरा फोन केलथि मुदा हम हुनका लग ता धरि नहि आयल रही जा धरि हमर नमाज समाप्त नहि भ गेल। तखन हुनकासँ भेंट भेल। ओ पुछलखिन: अहाँ केँ हमरा लग आबय मे की रोकल गेल? अबू सईद जवाब देलखिन; हम प्रार्थना क' रहल छी। ओ कहलनि जे, की अल्लाह तबराका व तआला नहि कहलनि जे, हे विश्वासी लोकनि, अल्लाह केर आह्वान आ रसूलुल्लाह केर आह्वान केँ पूरा करू जखन रसूलुल्लाह अहाँ केँ कोनो एहन चीज पर बजबैत छथि जे अहाँ केँ जीवन दैत अछि’। -अल अनफाल : 24-। तखन ओ कहलनि: 'की हम एहि मस्जिद सँ बाहर निकलबा सँ पहिने अहाँ केँ कुरान मे सबसँ पैघ अक्षर सिखाबी? अबू सईद बिन अल मुअल्ला कहलनि; जखन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहुअलैहि वसल्लम जाय वाला छलाह त हम हुनका याद दिला देलियनि, तखन ओ कहलनि: 'दुनिया के रब्ब अल्लाह के स्तुति हो'. -अल फतिहाह: 2-, जाहि मे अस्साबू' अल मत्सानी -सात दोहराओल गेल आयत- आ महान कुरान जे हमरा देल गेल छल, शामिल अछि।