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Sunnah membaca Doa Iftitah - 4: SUBHANAKALLAHUMMA WA BIHAMDIKA TABAARAKASMUKA WA TA'ALA JADDUKA …
Imam Tirmidzi : 225حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مُوسَى الْبَصْرِيُّ حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ سُلَيْمَانَ الضُّبَعِيُّ عَنْ عَلِيِّ بْنِ عَلِيٍّ الرِّفَاعِيِّ عَنْ أَبِي الْمُتَوَكِّلِ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا قَامَ إِلَى الصَّلَاةِ بِاللَّيْلِ كَبَّرَ ثُمَّ يَقُولُ سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ وَتَبَارَكَ اسْمُكَ وَتَعَالَى جَدُّكَ وَلَا إِلَهَ غَيْرُكَ ثُمَّ يَقُولُ اللَّهُ أَكْبَرُ كَبِيرًا ثُمَّ يَقُولُ أَعُوذُ بِاللَّهِ السَّمِيعِ الْعَلِيمِ مِنْ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ مِنْ هَمْزِهِ وَنَفْخِهِ وَنَفْثِهِقَالَ أَبُو عِيسَى وَفِي الْبَاب عَنْ عَلِيٍّ وَعَائِشَةَ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ وَجَابِرٍ وَجُبَيْرِ بْنِ مُطْعِمٍ وَابْنِ عُمَرَ قَالَ أَبُو عِيسَى وَحَدِيثُ أَبِي سَعِيدٍ أَشْهَرُ حَدِيثٍ فِي هَذَا الْبَابِ وَقَدْ أَخَذَ قَوْمٌ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ بِهَذَا الْحَدِيثِ وَأَمَّا أَكْثَرُ أَهْلِ الْعِلْمِ فَقَالُوا بِمَا رُوِيَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُ سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ وَتَبَارَكَ اسْمُكَ وَتَعَالَى جَدُّكَ وَلَا إِلَهَ غَيْرُكَ وَهَكَذَا رُوِيَ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا عِنْدَ أَكْثَرِ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ التَّابِعِينَ وَغَيْرِهِمْ وَقَدْ تُكُلِّمَ فِي إِسْنَادِ حَدِيثِ أَبِي سَعِيدٍ كَانَ يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ يَتَكَلَّمُ فِي عَلِيِّ بْنِ عَلِيٍّ الرِّفَاعِيِّ و قَالَ أَحْمَدُ لَا يَصِحُّ هَذَا الْحَدِيثُ
हमरा सब के कहने छथि [मुहम्मद बिन मूसा अल बशरी] कहलनि; हमरा सब के [ज'फर बिन सुलेमान अदल द्लुबाई] स [अली बिन अली अर रिफाई] स [अबू अल मुतावक्किल] स [अबू सईद अल खुदरी] स कहलक अछि ओ कहलक; 'जखन अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम राति के नमाज के लेल ठाढ़ भ' जाइत छलाह त' तकबीर कहैत छलाह आ पढ़ैत छलाह: 'सुभानका अल्लाहुम्मा वा बिहमदीका वा तबरकास मुका वा तआला जद्दुका वा ला इलाहा इल्लाह घैरुका - महिमा अहाँक हे अल्लाह, हम अहाँक स्तुति करैत छी, अहाँक शुभकामना अछि।' नाम, उदात्त अछि अहाँक धन आ महानता, अहाँक छोड़ि कोनो देवता इबादत योग्य नहि छथि-, ' तखन पाठ करू: 'अल्लाहु अकबर कबीरा - अल्लाह सबसँ पैघ आ महान छथि-, ' तखन पाठ करू: 'अ'उद्ज़ू बिल्लीहिस समी'इल अलीइम मिनासी स्याथनीर रजीइम मिन हमजीहि वा नफखिही वा नफसीही - हम अल्लाह मे शरण लैत छी, सर्वश्रोता, सर्वज्ञ, अभिशप्त शैतान सँ, ओकर प्रलोभन सँ, ओकर उड़ाब आ ओकर फुसफुसाहटि सँ-'। अबू ईसा कहलनि; 'एहि अध्याय मे अली, 'आइशा, अब्दुल्लाह बिन मसूद, जाबिर, जुबैर बिन मुथ'इम आ इब्न उमर सँ सेहो रिवायत अछि' | अबू ईसा कहलनि; 'एहि अध्याय मे अबू सईद के हदीस सबसँ बेसी लोकप्रिय अछि।' किछु विद्वान एहि हदीस के अभ्यास करैत छथि | तथापि, अधिकांश पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ रिवायत हदीस सँ सहमत छथि, जे ओ पढ़लनि: 'सुभानका अल्लाहुम्मा वा बिहमदीका वा तबअरकास मुका वा तआला जदुका वा ला इलाहा इल्लाह घैरुका -महिमा अहाँक हे अल्लाह, हम अहाँक स्तुति करैत छी, अहाँक नाम धन्य अछि, अहाँक धन ऊँच अछि आ... महानता, अहाँक छोड़ि कोनो देवता पूजन योग्य नहि छथि-'। इ उमर बिन अल खथथाब आ अब्दुल्लाह बिन मसूद के रिवायत सेहो अछि | ई हदीस ताबीइन आरू ओकरऽ बाद के अधिकांश विद्वानऽ द्वारा व्यापक रूप स॑ अभ्यास करलऽ गेलऽ छेलै । अबू सईद के हदीस में संचरण के श्रृंखला के चर्चा सेहो भेल छल, जतय याह्या बिन सैद अली बिन अली अर रिफाई के चर्चा केने छलाह | इमाम अहमद कहलनि जे, ई हदीस प्रामाणिक नहि अछि।