प्रतिनिधि हदीस
इमाम अबू दाऊद : 156
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الرَّازِيِّ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ قَالَسُئِلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ الْوُضُوءِ مِنْ لُحُومِ الْإِبِلِ فَقَالَ تَوَضَّئُوا مِنْهَا وَسُئِلَ عَنْ لُحُومِ الْغَنَمِ فَقَالَ لَا تَوَضَّئُوا مِنْهَا وَسُئِلَ عَنْ الصَّلَاةِ فِي مَبَارِكِ الْإِبِلِ فَقَالَ لَا تُصَلُّوا فِي مَبَارِكِ الْإِبِلِ فَإِنَّهَا مِنْ الشَّيَاطِينِ وَسُئِلَ عَنْ الصَّلَاةِ فِي مَرَابِضِ الْغَنَمِ فَقَالَ صَلُّوا فِيهَا فَإِنَّهَا بَرَكَةٌ
हमें बताया है [उथमान बिन अबू सय्यबा] ने हमें बताया है [अबू मुअविया] ने हमें बताया है [अल अमासी] [अब्दुल्ला बिन अब्दुल्ला अर-रज़ी] से [अब्दुर्रहमान बिन अबू लैला] से [अल-बरा` बिन अज़ीब] ने कहा; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से एक बार ऊंट का मांस खाने के लिए वज़ू करने के बारे में पूछा गया था। तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "इसके लिए वज़ू करो!" और उनसे बकरे का मांस खाने के लिए वज़ू करने के बारे में भी पूछा गया था। तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "इसकी वजह से वज़ू मत करो!" और उनसे ऊंट के लंगर की जगह पर नमाज़ पढ़ने के बारे में भी पूछा गया था, तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "उस जगह पर नमाज़ मत करो, क्योंकि यह शैतानों में से एक है।" और उनसे यह भी पूछा गया कि ऐसी जगह पर नमाज़ कैसे पढ़ी जाती है जहाँ बकरियाँ बंधी होती हैं, तो उन्होंने कहा: "इसी जगह नमाज़ पढ़ो, क्योंकि उस जगह पर बरकत है।"