प्रतिनिधि हदीस
इमाम तिर्मिदज़ी : 80
حَدَّثَنَا أَبُو عُبَيْدَةَ بْنُ أَبِي السَّفَرِ وَهُوَ أَحْمَدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْهَمْدَانِيُّ الْكُوفِيُّ وَإِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ قَالَ أَبُو عُبَيْدَةَ حَدَّثَنَا وَقَالَ إِسْحَقُ أَخْبَرَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ بْنُ عَبْدِ الْوَارِثِ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ حُسَيْنٍ الْمُعَلِّمِ عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ قَالَ حَدَّثَنِي عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَمْرٍو الْأَوْزَاعِيُّ عَنْ يَعِيشَ بْنِ الْوَلِيدِ الْمَخْزُومِيِّ عَنْ أَبِيهِ عَنْ مَعْدَانَ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ أَبِي الدَّرْدَاءِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَاءَ فَأَفْطَرَ فَتَوَضَّأَفَلَقِيتُ ثَوْبَانَ فِي مَسْجِدِ دِمَشْقَ فَذَكَرْتُ ذَلِكَ لَهُ فَقَالَ صَدَقَ أَنَا صَبَبْتُ لَهُ وَضُوءَهُ قَالَ أَبُو عِيسَى و قَالَ إِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ مَعْدَانُ بْنُ طَلْحَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى وَابْنُ أَبِي طَلْحَةَ أَصَحُّ قَالَ أَبُو عِيسَى وَقَدْ رَأَى غَيْرُ وَاحِدٍ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَغَيْرِهِمْ مِنْ التَّابِعِينَ الْوُضُوءَ مِنْ الْقَيْءِ وَالرُّعَافِ وَهُوَ قَوْلُ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ وَابْنِ الْمُبَارَكِ وَأَحْمَدَ وَإِسْحَقَ و قَالَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ لَيْسَ فِي الْقَيْءِ وَالرُّعَافِ وُضُوءٌ وَهُوَ قَوْلُ مَالِكٍ وَالشَّافِعِيِّ وَقَدْ جَوَّدَ حُسَيْنٌ الْمُعَلِّمُ هَذَا الْحَدِيثَ وَحَدِيثُ حُسَيْنٍ أَصَحُّ شَيْءٍ فِي هَذَا الْبَابِ وَرَوَى مَعْمَرٌ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ فَأَخْطَأَ فِيهِ فَقَالَ عَنْ يَعِيشَ بْنِ الْوَلِيدِ عَنْ خَالِدِ بْنِ مَعْدَانَ عَنْ أَبِي الدَّرْدَاءِ وَلَمْ يَذْكُرْ فِيهِ الْأَوْزَاعِيَّ وَقَالَ عَنْ خَالِدِ بْنِ مَعْدَانَ وَإِنَّمَا هُوَ مَعْدَانُ بْنُ أَبِي طَلْحَةَ
ने हमें बताया [अबू उबैदा बिन अबू अस सफ़र (यानी) अहमद बिन अब्दुल्लाह अल हमदानी अल कूफी]। और [इसहाक बिन मंसूर] ने कहा; ने हमें बताया [अबू उबैदा], इसहाक ने कहा; ने हमें बताया [अब्दु अश्शामद बिन अब्दुल वारित्स] ने कहा, ने मुझे [मेरे पिता] ने [हुसैन अल मुअल्लिम] से [याह्या बिन अबू कत्सिर] से कहा; ने मुझे [अब्दुर्रहमान बिन अमरू अल औज़ाई] से [यासी इब्नुल वालिद अल मखज़ुमी] से [अपने पिता] से [मदान बिन अबू तल्हा] से [अबू दर्दा] से बताया कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को उल्टी हुई, फिर उन्होंने अपना रोज़ा तोड़ा और वुज़ू किया। अबू दर्दा ने कहा; "फिर मैं दमिश्क की मस्जिद में [सौबान] से मिला, मैंने उसे इस बारे में बताया, तो उसने कहा, "यह सच है, असल में मैंने ही उस पर वज़ू का पानी डाला था।" अबू ईसा ने कहा; इसहाक बिन मंशूर ने कहा; "मदन बिन थलहा।" अबू ईसा ने कहा; "इस बीच इब्न अबू तलहा ज़्यादा असली हैं।" अबू ईसा ने कहा; "पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथियों और ताबीन में से सिर्फ़ एक ही विद्वान ऐसा नहीं है जो यह मानता हो कि उल्टी या खून (नाक से खून आना) की वजह से इंसान को वज़ू करना चाहिए। यह राय सुफ़यान अत्स त्सौरी, इब्नुल मुबारक, अहमद और इसहाक ने ली थी।" जबकि कुछ विद्वानों का मानना है कि उल्टी या नाक से खून आने पर व्यक्ति को वज़ू नहीं करना चाहिए। यह राय मलिक और सयाफ़ी ने ली थी। हुसैन अल मुअल्लिम ने माना कि यह हदीस अच्छी है। और हुसैन की हदीस इस अध्याय की सबसे अच्छी हदीस है। म'मर ने यह हदीस याह्या बिन अबू कसीर से सुनाई, लेकिन वह इसमें गलत थे। उन्होंने कहा; "यासी इब्नुल वालिद से, खालिद बिन मदन से, अबू दर्दा से, और उन्होंने इसमें अल औज़ाई का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा खालिद बिन मदन से, जबकि असल में वह मदन बिन अबू तलहा थे।"