हदीस
Batalnya wudhu: barangsiapa yang menyentuh kemaluannya, maka hendaklah dia berwudhu
Imam Tirmidzi : 77حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبِي عَنْ بُسْرَةَ بِنْتِ صَفْوَانَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ مَسَّ ذَكَرَهُ فَلَا يُصَلِّ حَتَّى يَتَوَضَّأَقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ أُمِّ حَبِيبَةَ وَأَبِي أَيُّوبَ وَأَبِي هُرَيْرَةَ وأَرْوَى ابْنَةِ أُنَيْسٍ وَعَائِشَةَ وَجَابِرٍ وَزَيْدِ بْنِ خَالِدٍ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ قَالَ هَكَذَا رَوَاهُ غَيْرُ وَاحِدٍ مِثْلَ هَذَا عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ بُسْرَةَ وَرَوَى أَبُو أُسَامَةَ وَغَيْرُ وَاحِدٍ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ مَرْوَانَ عَنْ بُسْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَحْوَهُ حَدَّثَنَا بِذَلِكَ إِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ بِهَذَا وَرَوَى هَذَا الْحَدِيثَ أَبُو الزِّنَادِ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ بُسْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَدَّثَنَا بِذَلِكَ عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ بُسْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَحْوَهُ وَهُوَ قَوْلُ غَيْرِ وَاحِدٍ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالتَّابِعِينَ وَبِهِ يَقُولُ الْأَوْزَاعِيُّ وَالشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَإِسْحَقُ قَالَ مُحَمَّدٌ وَأَصَحُّ شَيْءٍ فِي هَذَا الْبَابِ حَدِيثُ بُسْرَةَ و قَالَ أَبُو زُرْعَةَ حَدِيثُ أُمِّ حَبِيبَةَ فِي هَذَا الْبَابِ صَحِيحٌ وَهُوَ حَدِيثُ الْعَلَاءِ بْنِ الْحَارِثِ عَنْ مَكْحُولٍ عَنْ عَنْبَسَةَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ عَنْ أُمِّ حَبِيبَةَ و قَالَ مُحَمَّدٌ لَمْ يَسْمَعْ مَكْحُولٌ مِنْ عَنْبَسَةَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ وَرَوَى مَكْحُولٌ عَنْ رَجُلٍ عَنْ عَنْبَسَةَ غَيْرَ هَذَا الْحَدِيثِ وَكَأَنَّهُ لَمْ يَرَ هَذَا الْحَدِيثَ صَحِيحًا
हमनी के बतवले बाड़े [इशहाक बिन मंसूर] कहले बाड़े; हमनी के बतवले बाड़े [याह्या बिन सईद अल कथथान] से [हिस्याम बिन उर्वाह] कहले बाड़े; हमरा [हमार पिता] के [बुसरा बिंत शफवान] से सूचित कइले बा कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले बाड़न कि जे केहू ओकरा जननांग के छूवेला तबले नमाज ना करे जबले ऊ वजूद ना कर लेव’. ऊ कहले कि; 'एह अध्याय में उम्म हबीबाह, अबू अय्यूब, अबू हुरैरा, अरवा बिंत उनैस, ऐसिया, जाबीर, जैद बिन खालिद आ अब्दुल्लाह बिन अमरू से भी रिवायत बा।' अबू ईसा कहले कि; 'ई हदीस हसन सहीह के रिवायत बा'। ऊ कहले कि; 'एह तरह से ई हदीस खाली एक आदमी ना बतवले, हिसियाम बिन उर्वाह से, अपना पिता से, बुसरा से।' आ [अबू उसामाह] के इतिहास भी अकेले अइसन नइखे जे एह हदीस के बखान कइले बा, [हिसियाम बिन उरवाह] से, [उनकर पिता] से, [मरवान] से, [बुसरा] से, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से। आ इशाक बिन मंसूर भी इहे बात बतवले, उ कहले; 'अबू उसामाह हमनी के अयीसन कहले रहले'। आ ई हदीस अबू अज़ जिनाद, उरवाह से, बुसरा से, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से भी बतवले बाड़न। इहो उहे बा जवन हमनी के [अली बिन हुजर] बतवले बाड़े। ऊ कहले कि; 'हमनी के [अब्दुररहमान बिन अबू अज़ जिनाद], [उनकर पिता] से, [उरवाह] से, [बुसरा] से, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से अयीसन बतावल गईल बा। आ ई खाली एगो आदमी के ना ह, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आ तबीईन के साथियन से. एकरा के अल औजाई, स्याफीई, अहमद अवुरी इशाक' भी लेले रहले। मुहम्मद कहले कि; 'एह अध्याय में सबसे प्रामाणिक हदीस बुसरा के हदीस ह'। आ अबू ज़ुराह कहले कि; 'एह अध्याय में उम्म हबीबा के हदीस भी प्रामाणिक बा, यानी मखुल से अल अला इब्नुल हरिथ के हदीस, उम्म हबीबा से अनबसाह बिन अबू सुफियन से। मुहम्मद कहले कि; 'मखुल 'अनबसाह बिन अबू सुफियन' से कबहूँ नईखन सुनले।' जबकि 'अनबसाह एगो आदमी से, 'एह हदीस के अलावा अनबसाह से, अइसे रिवायत कइले बाड़न, जइसे कि ऊ सोचत होखस कि ई हदीस प्रामाणिक बा'।